जांच के ‘फेरे’ में सामूहिक विवाह के लाभार्थी
गाजियाबाद। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का लाभ उठाकर सात जन्मों के बंधन में बंधे 136 जोड़े अब प्रशासन की रडार पर आ गए हैं। योजना में दूसरे जिलों में व्यापक पैमाने पर धांधली सामने आने के बाद इनकी विभागीय स्तर पर गोपनीय जांच शुरू हो गई है। इसके चलते ही इनमें से अधिकतर जोड़ों को मिलने वाला अनुदान भी नहीं मिल पा रहा है। इन जोड़ों के लिए सामान उपलब्ध कराने वाले ज्वेलर से लेकर फर्नीचर वाले तक का भी भुगतान रोक दिया गया है।
आठ फरवरी को मुरादनगर के आईटीएस कालेज में शादी समारोह आयोजित किया गया था, जिसमें 136 जोड़े सात जन्मों के बंधनों में बंधे थे। लेकिन योजना में कई जिलों में फर्जीवाड़ा सामने आने पर अब प्रशासन सतर्क हो गया है। कई जगह अनुदान के लिए पहले से ही शादीशुदा लोगों के दुबारा शादी करने की बात सामने आई थी। इसको देखते हुए शासन के निर्देश पर अब प्रशासन स्तर से सत्यापन कराया जा रहा है।
डासना निवासी अहसान ने बताया कि विवाह समारोह के एक महीने बाद अब सोमवार को सदर तहसील में सत्यापन के लिए बुलाया गया है। अभी तक न तो 20 हजार रुपये बेटी के खाते में आए हैं और न ही उसे बेड मिला है, जबकि कई दफा दफ्तर के चक्कर काट चुके हैं। सत्यापन का काम समारोह से पहले होना चाहिए था। रसीद लेकर जाते हैं तो फर्नीचर वाला बेड देने से मना कर देता है। लोनी निवासी अंजलि के पिता कहते हैं कि अनुदान को लेकर कहीं पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। समाज कल्याण विभाग कहता है कि पैसा आपके ब्लाक को भेज दिया गया है। ब्लाक वाले कहते हैं पैसा अभी मिला ही नहीं है।
अनुदान के लिए भटक रहे लाभार्थी
योजना के लाभार्थी अब अनुदान के लिए सरकारी दफ्तरों से लेकर दुकानों के चक्कर काट रहे हैं। शादी के एक महीने बाद भी उन्हें न तो 20 हजार रुपये का अनुदान मिला है और न ही शगुन के तौर पर दिया गया बेड। आलम यह है कि अब विभाग एक दूसरे पर पल्ला झाड़ रहे हैं।
शादी करने वाले जोड़ों को शगुन के तौर पर चांदी की एक जोड़ी पायल 25 ग्राम की, दो जोड़ी बिछिया, बुडेन बेड बाक्स वाला, गद्दा, बेड सीट, तकिया, कंबल समेत 13 सामान दिए गए। पायल की खरीद मालीवाड़ा स्थित एक ज्वेलर के यहां से की गई। पायल व दो बिछिया प्रति जोड़े के हिसाब से 1125 रुपये के हिसाब से खरीदी गई, जिनका आज तक भुगतान नहीं हुआ है। वहीं, क्रासिंग रिपब्लिक के पास स्थित साबेरी मार्केट में एक फर्नीचर दुकान से 3500 रुपये प्रति बेड तय किया गया। समारोह में सिर्फ 37 जोड़ों को बेड दिए गए। बाकी सभी को यह कहकर रसीद दे दी गई कि वो साबेरी मार्केट में संबंधित फर्नीचर दुकान पर रसीद दिखाकर अपना बेड उठा लें, लेकिन अब फर्नीचर वाला बेड देने को तैयार नहीं है। क्योंकि उसका समाज कल्याण विभाग की तरफ से भुगतान नहीं किया गया।
शासन की ओर से कुछ बिंदुओं को लेकर जांच करने के निर्देश थे, जिन्हें सत्यापित किया जा रहा है। हमारी तरफ से पैसा संबंधित ब्लाक, तहसील, नगर पालिका व पंचायतों को भेज दिया गया है। अब उन्हीं को पैसा देना है। कुछ जगहों पर पैसा जारी भी किया जा चुका है, जितने भी जोड़ों की शादी हुई है वो निश्चिंत रहें कि उन्हें अनुदान पूरा मिलेगा। - परितोष श्रीवास्तव, जिला समाज कल्याण अधिकारी