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Ghaziabad News: ट्रॉनिका सिटी के 3000 उद्योगों पर बिजली कटौती की मार

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गाजियाबाद। उद्योगों को बढ़ावा देने की सरकार की कवायद को लोनी के ट्रॉनिका सिटी क्षेत्र में जोर का झटका लग रहा है। यहां लगभग तीन हजार उद्योगों पर बिजली कटौती की मार पड़ रही है। रोजाना औसतन चार से छह घंटे की कटौती से उद्योगों का उत्पादन 30 प्रतिशत तक गिर गया है। डीजल जनरेटर चलाने पर पाबंदी के बीच बिजली के कट लगने से उद्योगों की रफ्तार थम रही है, जिससे रोजाना उद्योगों को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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दो दशक पहले दिल्ली से सटे लोनी में औद्योगिक क्षेत्र ट्रॉनिका सिटी विकसित की गई थी। यहां उद्योगों की संख्या बढ़ती रही लेकिन सुविधाओं में कोई इजाफा नहीं हुआ। इसका खामियाजा अब तीन हजार उद्योगों को भुगतना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी जर्जर बिजली तंत्र के कारण हो रही है। थोड़ी से हवा चल जाए या बारिश हो जाए तो बिजली घंटों के लिए गुल हो जाती है। ओवरलोड सबस्टेशन और ट्रांसफार्मर उद्योगों का लोड नहीं झेल पा रहे हैं। औद्योगिक संगठनों के अनुसार ट्रॉनिका सिटी में 11 औद्योगिक सेक्टर हैं। पावी और मंडोला के दो बड़े बिजली उपकेंद्रों से यहां आपूर्ति की जा रही है।
सबसे बड़ी समस्या मंडोला से ट्रॉनिका सिटी तक डाली गई भूमिगत बिजली की लाइन में बार-बार फॉल्ट से हो रही है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान बार-बार लाइन क्षतिग्रस्त हो रही है। तीन दिन पहले ही बिजली कटौती से परेशान उद्यमियों ने स्थानीय बिजलीघर पर प्रदर्शन भी किया था। बिजली कटौती के कारण उद्योगों को अपने उत्पादन को बार-बार रोकना पड़ रहा है, जिससे उत्पादन की दर में भारी गिरावट आ रही है। समय पर बिजली की उपलब्धता न होने से मशीनें रुक जाती हैं और कर्मचारियों को बिना काम के बैठना पड़ रहा है, जिससे उत्पादन लक्ष्यों को पूरा करना कठिन हो रहा है।
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24 घंटे मिले बिजली तो क्यों चलेंगे जनरेटर
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के बीच पिछले वर्ष डीजल जनरेटर (डीजी सेट) चलाने पर पाबंदी लगा दी गई थी। ऐसे में ट्रॉनिका सिटी के उद्योगों पर दोहरी मार पड़ रहा है। जर्जर तार, बिजली के पोल और यहां बने तीन 33 केवी उपकेंद्रों पर क्षमता से अधिक भार पड़ने से रोज कोई न कोई फॉल्ट हो रहा है। बिजली आपूर्ति बंद होते ही उद्योगों में उत्पादन भी बंद हो रहा है। उद्यमी संगठनों का कहना है कि उद्यमी पहले ही डीजी सेट चलाने के पक्ष में नहीं हैं। किसी भी तरह के जनरेटर के उपयोग से उद्योगों पर आर्थिक बोझ पड़ता है। उद्योगों को 24 घंटे बिजली मिलेगी तो जनरेटर चलाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।

जिले में केवल एक फॉल्ट लोकेटर
उद्यमियों का कहना है कि ट्राॅनिका सिटी में रोजाना फॉल्ट से बिजली गुल हो रही है लेकिन फॉल्ट को तलाशने में ही घंटों समय लग जाता है। पूरे गाजियाबाद में केवल एक फॉल्ट लोकेटर है। पहले सूचना भेजी जाती है, इसके बाद टीम यहां आती है। इस पूरी प्रक्रिया में दो से तीन घंटे का समय लग जाता है। इसके बाद फॉल्ट तलाशने और मरम्मत करने में समय लगता है। इस तरह की अव्यवस्थाओं के बीच उद्योग चलाना काफी मुश्किल हो रहा है।

वर्जन

ट्रोनिका सिटी बिजली कटौती की समस्या से जूझ रहा है। यह समस्या यहां के उद्योगों के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा कर रही है और उनके उत्पादन, लाभ और रोजगार पर बुरा प्रभाव डाल रही है। औद्योगिक इकाइयों के उत्पादन में 30 प्रतिशत तक की गिरावट का अनुमान है। सरकार को इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान करना चाहिए। - अमित बंसल, वाइस चेयरमैन, इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन गाजियाबाद
ट्रॉनिका सिटी में अधिकांश उद्योग दिल्ली से शिफ्ट होकर आए हैं। दो दशक बाद भी यहां उद्यमियों को सड़क-बिजली जैसी आवश्यक सुविधाएं नहीं मिल सकी हैं। बिजली कटौती से उद्योगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। यही स्थिति बनी रही तो उद्यमियों को अपना कारोबार लेकर कहीं दूसरी जगह विकल्प तलाशना पड़ेगा। - अनिल कुमार, महामंत्री, ट्रॉनिका सिटी मैन्युफेक्चरिंग एसोसिएशन
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