सरकारी अस्पताल के चिकित्सकों पर लापरवाही के साथ मरीजों से ठीक से व्यवहार नहीं करने के आरोप लगते रहते हैं। कठिन परिस्थितियों में मरीजों का इलाज करने वाले सरकारी चिकित्सकों की दशा की ओर किसी का ध्यान नहीं जाता है।
प्राइवेट अस्पतालों में एक चिकित्सक दिन में मुश्किल से 20 से 30 मरीजों का चेकअप करते हैं, जबकि सरकारी अस्पताल के चिकित्सक एक दिन में 250 से भी अधिक मरीजों का चेकअप करते हैं।
सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी के चलते बाकी चिकित्सकों पर काम का कई गुना लोड है। अभी दिल्ली में आल इंडिया फेडरेशन ऑफ गवर्नमेंट डाक्टर की हुई बैठक में सभी चिकित्सकों ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया था।
फेडरेशन के संयुक्त सचिव विकासेंदू अग्रवाल ने बताया कि बैठक में 18 राज्यों के प्रतिनिधियों ने डाक्टर्स के सरकारी नौकरी के प्रति घटते रुझान पर चिंता व्यक्त की थी। सरकारी डाक्टर्स पर असंख्य मरीजों का इलाज करने के साथ-साथ पोस्टमार्टम ड्यूटी, कोर्ट एविडेंस से लेकर वीआईपी ड्यूटी का भी भार रहता है।
प्रदेश भर में पीएमएस कैडर की 12 हजार पोस्ट हैं जिसमें नए खुलने वाले अस्पतालों और सीएचसी पीएचसी शामिल नहीं हैं। पोस्ट के लिहाज से प्रदेश में 70 फीसदी डाक्टर्स की कमी है।