मोक्षदायिनी को अब भी ‘मुक्ति’ का इंतजार
- 2017 में भी शुरू नहीं हो पाई एसटीपी योजना, गंगा में गिर रहा शहर का दूषित पानी
- इस साल मार्च में योजना शुरू होने की उम्मीद
भूतेश्वर प्रसाद शर्मा
गढ़मुक्तेश्वर। गढ़-ब्रजघाट में बिछाई जा रही सीवर लाइन और दो स्थानों पर बन रहे ट्रीटमेंट प्लांटों का निर्माण बीते साल मार्च में ही पूरा होना था, लेकिन अब तक इनका निर्माण नहीं हो सका है। नतीजतन, गंगा में दूषित पानी गिर रहा है। इसको लेकर जिला प्रशासन ने गुणवत्ता परखने के साथ ही काम को जल्द पूरा कराने के उद्देश्य से जो कमेटी बनाई थी, वह भी कोई ठोस कदम नहीं उठा सकी।
राष्ट्रीय नदी का दर्जा मिलने के बाद मनमोहन सरकार ने 2009 में गंगा एक्शन प्लान के तहत गढ़-ब्रजघाट के लिए सीवर ट्रीटमेंट प्लांट योजना को मंजूरी दी थी। साढ़े 40 करोड़ से भी अधिक की लागत वाली इस योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी जल निगम को दी गई है। इससे पहले चरण के दौरान गढ़-ब्रजघाट के कई मुख्य रास्तों समेत गली-मोहल्लों में सीवर लाइन बिछाने का काम किया गया था, लेकिन इसके बाद भी नक्का कुआं रोड समेत कई वार्डों में अब तक सीवर लाइन नहीं बिछ पाई है। जबकि ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित न होने से आवासीय क्षेत्र का दूषित पानी आज भी बेरोकटोक गंगा में ही गिर रहा है। इससे प्रदूषण बढ़ने के साथ गंगा में रहने वाले दुर्लभ प्रजाति के जलीय जीव जंतुओं के अस्तित्व को भी तेजी से खतरा बढ़ रहा है। इसके अलावा सीवर लाइन बिछाने के दौरान तोड़ी गई कई सड़कों की मरम्मत कई साल बीतने के बाद भी नहीं हो पाई है, इससे लोगों को ऊबड़ खाबड़ रास्ते और उनके गड्ढों में जलभराव होने से आवागमन में भारी दिक्कत झेलनी पड़ रही है। सीवर लाइन के शेष बचे काम को अविलंब पूरा कराने और नयाबांस व ब्रजघाट में बनने वाले ट्रीटमेंट प्लांटों को लेकर पिछले साल जिला प्रशासन ने कुछ सक्रियता दिखाई थी। इसके बाद डीएम ने गढ़ एसडीएम के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया था, जिसे सीवर लाइन के काम को पिछले साल मार्च तक पूरा कराने के साथ ही उसकी गुणवत्ता की निगरानी भी करनी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। तय अवधि के बाद भी नौ माह बीत चुके हैं, लेकिन अब तक ट्रीटमेंट प्लांट तो दूर बल्कि सीवर लाइन बिछाने का काम भी पूरा नहीं हो पाया है।
सीवर लाइन में घरेलू कनेक्शन जोड़ने के लिए शासन स्तर से 12.23 करोड़ की रकम मंजूर की गई है। इससे 31 मार्च तक हर हाल में एसटीपी योजना चालू होने पर आबादी से होकर गंगा में गिर रहे दूषित पानी पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी।
- एसपी शर्मा, प्रोजैक्ट मैनेजर