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खटाई में पड़ सकता है 281 एकड़ भूमि का अधिग्रहण

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खटाई में पड़ सकता है 281 एकड़ भूमि का अधिग्रहण
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मधुबन बापूधाम योजना के लिए बची हुई जमीन में से 281 एकड़ जमीन का अधिग्रहण आसान नहीं है। एक और जहां जीडीए भूमि अधिग्रहण एक्ट-2013 के हिसाब से मुआवजा देने की स्थिति में नहीं है(

वहीं दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद से किसान इससे कम मुआवजे पर राजी नहीं हो रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में 281 एकड़ भूमि का अधिग्रहण खटाई में पड़ सकता है।
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30 नवंबर 2016 को आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से 281 एकड़ जमीन के मालिक किसानों को उम्मीद है कि उनकी जमीन सात करोड़ रुपये प्रति बीघा के हिसाब से अधिग्रहित की जाएगी।


उधर, जीडीए इस जमीन को एक से डेढ़ करोड़ रुपये बीघा के हिसाब से अधिग्रहण करना चाह रहा है। प्रति बीघा करीब साढे़ पांच करोड़ के अंतर के चलते किसान और जीडीए के बीच करार होना आसान बात नहीं होगी।

किसानों और जीडीए के बीच चली आ रही मुआवजे की इस जंग का ही कारण है कि मधुबन बापूधाम योजना कई साल बीत जाने के बाद भी परवान नहीं चढ़ पा रही है। इस योजना में न तो अभी सीवर व्यवस्था दुरुस्त हो सकी है और नहीं पानी की।

आवागमन के लिए मुख्य रास्ता भी तैयार नहीं हो सका है। मधुबन बापूधाम योजना से जीडीए को काफी उम्मीदे हैं। यही योजना आर्थिक तंगी से जूझ रहे जीडीए को बाहर निकाल सकती है, मगर फिलहाल मुआवजा विवाद में उलझी हुई है।

281 एकड़ जमीन अर्जन मुक्त करना ही जीडीए के लिए अंतिम उपाय हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अर्जन मुक्त करके जीडीए न केवल सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बच जाएगा, बल्कि उसे हुडको से भारी भरकम कर्ज भी नहीं लेना पड़ेगा।
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इसके साथ ही जीडीए को 2006 से लेकर अब तक मुआवजे पर 15 प्रतिशत ब्याज से भी मुक्ति मिल जाएगी। इसके साथ ही अरजेंसी क्लोज के रूप में कुल मुआवजा राशि पर 75 प्रतिशत अतिरिक्त रकम का भी भुगतान नहीं करना पडे़गा। हालांकि ऐसे में जीडीए को अपनी योजना के लिए सिर्फ करीब 950 एकड़ जमीन से ही काम चलाना होगा।
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