शहर के लोगों को शुद्ध पानी पिलाने में नगर निगम फेल साबित हो रहा है। यहां तक कि निगम कार्यालय में सप्लाई होने वाला पानी भी मानकों पर फेल पाया गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम को सिटी जोन कार्यालय समेत 20 ट्यूबवेलों के सैंपल जांच में निगेटिव मिले हैं। अधिकांश स्थानों पर क्लोरीन के डोजर ही बंद मिले। यानी क्लोरीन सिर्फ कागजों में ही खरीदी और डाली जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की संयुक्त टीम हर महीने शहर में सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों, निगम के नलकूपों से पानी के सैंपल लेकर जांच कराती है ताकि पानी की गुणवत्ता खराब पाए जाने पर तत्काल सुधार कराया जा सके।
स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की ज्वाइंट टीम ने 18 नवंबर और पांच दिसंबर को शहर के 20 स्थानों से वॉटर सैंपल लेकर जांच कराई। इनमें से एक भी सैंपल जांच में पास नहीं हुआ। सभी सैंपलों में क्लोरीन की मात्रा शून्य मिली।
नगर निगम के सिटी जोन कार्यालय समेत 10 ट्यूबवेलों पर लगे डोजर बंद मिले। यानी यहां से पानी में क्लोरीन डाली ही नहीं जा रही थी। बिना क्लोरीन के पानी पीने से लोगों की सेहत बिगड़ सकती है। बावजूद इसके नगर निगम को न तो लोगों की सेहत की चिंता है न ही जांच का डर।
यहां मिले सैंपल फेल
दयानंद नगर नलकूप, पंचवटी कालोनी, नेहरू नगर सामुदायिक केंद्र, उच्च जलाशय नलकूप नेहरू नगर, कालका गढ़ी चौक नलकूप, नवयुग मार्केट नलकूप, सिटी जोनल कार्यालय नगर निगम, घंटाघर रामलीला मैदान नलकूप, कंपनी बाग नलकूप, बाला जी औषधायल के पास रिछपालपुरी, नई बस्ती नलकूप, रामलीला मैदान पानी की टंकी, आत्माराम का आहता, चंद्रसेन कालका गढ़ी, सतीश चंद राशन डीलर नासिरपुर, कृष्णा टेलर जीडीए के पास नेहरू नगर।
यहां क्लोरीन के डोजर मिले बंद
सिटी जोन निगम कार्यालय, कंपनी बाग नलकूप, दयानंद नगर नलकूप, पंचवटी कालोनी नलकूप, सामुदायिक केंद्र नेहरू नगर, उच्च जलाशय नलकूप नेहरू नगर, नवयुग मार्केट नलकूप, रामलीला मैदान नलकूप।
क्लोरीन खरीदी तो गई कहां
स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की संयुक्त टीम की जांच में खुलासा हुआ है कि निगम के 10 नलकूपों पर डोजर खराब पड़े थे। लंबे समय से यहां क्लोरीन नहीं पहुंच रही हैं, लेकिन निगम में क्लोरीन खरीदने के लिए ही हर साल लाखों रुपये का भुगतान किया जाता है। यानी क्लोरीन की खरीद और सप्लाई सिर्फ फाइलों में ही होती है। भुगतान में भी फर्जीवाड़ा हो रहा है।
बोले अधिकारी
अभी रिपोर्ट नहीं मिली है। हो सकता है सैंपल ऐसे प्वाइंट से लिया गया हो जहां क्लोरीन कम पहुंच रही हो। नलकूपों की जांच की जाएगी। अगर क्लोरीनेशन नहीं मिला तो संबंधित ऑपरेटर पर कार्रवाई की जाएगी। क्लोरीनेशन कराया जाएगा।
- मंजू गुप्ता, महाप्रबंधक जल, नगर निगम
क्लोरीनेशन न होने से जल जनित रोगों का खतरा
क्लोरीन डिसइंफेक्टेंट का काम करता है यानि पब्लिक वॉटर सप्लाई में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस ओर प्रोटोजोन को खत्म करता है, जो आमतौर पर वॉटर रिजर्वायर्स, पानी की लाइनों की दीवारों और स्टोरेज टैंक में पैदा हो जाते हैं।
इनकी वजह से लोग कॉलरा, टाइफाइड, डिसेंट्री जैसी जल जनित बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। ज्यादा गंभीर नहीं मानी जाने वाली इन बीमारियों से हर वर्ष कई लोगों मौत भी हो जाती है।
डा. शशांक शुक्ला ने बताया कि जल जनित रोगों की चपेट में लोग आसानी से आ जाते है, जिसकी प्रमुख वजह पानी का बैक्टीरिया और वायरस से पूरी तरह डिसइंफेक्ट नहीं होता है। भारत में क्लोरीन को डिसइंफेक्टेंट के तौर पर प्रयोग किया जाता है लेकिन विदेशों में अन्य तकनीकों का प्रयोग भी किया जाता है।