रिस्तल गांव में बिजली के खंभे टूटे, पेड़ भी गिरे
लोनी। रिस्तल गांव में रविवार शाम आए तूफान से ईंट भट्ठे के पास बनी करीब 20 झोपड़ियां उखड़ गई। झोपड़ियों के मलबे में दब कर करीब 50 से अधिक मजदूर और उनके परिजन घायल हो गए हैं। एक बच्ची के सिर में चोट लगी है। तूफान से गांव के बिजली के खंभे टूटे और पेड़ भी गिर गए।
रविवार शाम तेज तूफान रिस्तल गांव में आया। वहीं, ईंट के भट्ठे पर बागपत और बुढ़ाना से मजदूरों ने ईंट और छप्पर से झोपड़ियां बना रखी हैं। मजदूर अपने परिजनों के साथ इन झोपड़ियों में रहते हैं। वहीं, रविवार शाम को आए तेज तूफान में मजदूरों की झोपड़ियां उड़ने लगी। तूफान से बचने के लिए मजदूर महिला और बच्चों को लेकर झोपड़ियों में चले गए थे। झोपड़ियों में खड़ी दीवार तूफान के चलते गिर गई। दीवार के मलबे में दबकर 50 से अधिक युवक, महिलाएं और बच्चे घायल हो गए। तूफान जाने के बाद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला। मलबा गिरने से इशरत(12) के सिर में चोट लग गई। इशरत को अस्पताल में भर्ती कराया। इशरत के सिर में 15 टांके आए है। करीब 50 महिलाओं और युवकों को गुम चोट आई है।
8 बिजली के खंभे टूटे, ऊर्जा निगम ठीक करने में लगा
तूफान इतना तेज था कि रिस्तल गांव से महमूदपुर गांव की तरफ जाने वाले रास्ते में करीब 8 बिजली के खंभे टूट गए। समय रहते ऊर्जा निगम ने लाइट को बंद कर दिया। तूफान के बाद ऊर्जा निगम के कर्मचारी लाइट को ठीक करने में जुट गए। गांव के कुछ हिस्सों में लाइट नहीं आई। अधिशासी अभियंता नीरज कुमार यादव ने बताया कि 8 बिजली के खंभे उखड़ गए हैं। 33 और 11 केवी लाइन क्षतिग्रस्त हुई है। टीम द्वारा ठीक कराया गया है। संवाद