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फिरौती वसूलकर उद्यमी की हत्या करने की थी योजना

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फिरौती वसूलकर उद्यमी की हत्या करने की थी योजना
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गाजियाबाद। बौंझा औद्योगिक क्षेत्र से 25 जनवरी की रात अपह्रत किए गए उद्यमी अनिल कुमार अरोड़ा को गाजियाबाद पुलिस मुक्त न करा पाती तो उनकी जान बचनी मुश्किल थी। अपहरण करने वाला एक बदमाश राशिद उद्यमी का करीबी था। ऐसे में राज खुलने के डर से बदमाशों ने प्लानिंग की थी कि फिरौती की रकम वसूलने के बाद उसकी हत्या कर देंगे। अपहरणकर्ताओं के चंगुल से मुक्त हुए अनिल अरोड़ा को लेकर पुलिस गाजियाबाद पहुंची। अनिल ने एसएसपी को दो दिन में उसके साथ हुई घटना की पूरी कहानी बताई।
एसएसपी हरिनारायण सिंह ने रविवार शाम पुलिस लाइन में प्रेसवार्ता कर बताया कि बदमाश 25 जनवरी की रात कार से अपहरण कर अनिल अरोड़ा को मुरादनगर, मेरठ और शामली के रास्ते पानीपत और फिर हरियाणा के जींद लेकर गए। बदमाशों ने जींद में अपने एक दोस्त के बैंक्वेट हॉल में उसे दोस्त बताकर ठहराया। बैंक्वेट हाल मालिक को शक न हो, इसके लिए बदमाशों ने बताया कि उनका दोस्त नशे में है और चार-पांच घंटे आराम कर चला जाएगा। बदमाशों ने एक बार पानीपत से और तीन बार जींद से फोन कर फिरौती दो करोड़ अंबाला में मांगे थे। पुलिस को चकमा देने के लिए बदमाशों ने फिर लोकेशन बदली और वापस शामली आए, यहां से वह हरिद्वार जा रहे थे। हरिद्वार जाकर उनकी प्लानिंग थी कि फिर से फिरौती की कॉल करेंगे। एसएसपी ने बताया कि अपहरण करने वाले जींद हरियाणा निवासी व चंडीगढ़ एयरफोर्स के जवान प्रदीप, सरूरपुर मेरठ निवासी राशिद, कुशलिया मसूरी निवासी मोहसिन को गिरफ्तार कर लिया गया है। ट्रांजिट रिमांड पर उन्हें गाजियाबाद लाया जाएगा।
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मोहसिन के घर कुशलिया में रची थी अपहरण की साजिश
अपहरण की प्लानिंग एयरफोर्स के जवान प्रदीप और उद्यमी के पूर्व नौकर राशिद ने 20 जनवरी को मोहसिन के घर कुशलिया में बैठकर की थी। एसएसपी ने बताया कि इसके लिए उन्हें कार का इंतजाम करना था। दो दिन बाद 22 जनवरी को प्रदीप ने करनाल टोल प्लाजा के पास से कार चोरी की और 25 जनवरी को घटना को अंजाम दे दिया।

इंजेक्शन लगाकर रखा बेहोश, लोकेशन ट्रेस कर छुड़ाया
सीओ सेकेंड आतिश कुमार सिंह ने बताया कि बदमाशों ने अपहरण के अगली सुबह से ही उद्यमी को ‘फिनारगन’ दवा का इंजेक्शन देना शुरू कर दिया था। इसे लगाने के बाद उद्यमी बेहोश हो जाता था और उसके शोर मचाने की संभावना खत्म हो जाती थी। सीओ आतिश कुमार ने अपहरण हुए उद्यमी को मुक्त कराने के लिए गठित की गई पांच टीमों का नेतृत्व किया। सिहानी गेट एसओ विनोद कुमार पांडेय ने बदमाशों की लोकेशन ट्रेस की और इसके बाद पुलिस उद्यमी को बंधनमुक्त करा पाई।

दूसरा जन्म हुआ मेरा: अनिल
44 घंटे अपहरणकर्ताओं के चंगुल में फंसे उद्यमी अनिल अरोड़ा रविवार को गाजियाबाद पहुंच परिजनों से मिले तो उनकी आंखों में फिर से परिवार में पहुंचने की खुशी के आंसू थे। वह गाजियाबाद पुलिस की तारीफ करते नहीं थक रहे थे। अनिल का कहना है कि गाजियाबाद पुलिस इतनी तत्परता न दिखाती तो उनका बचना मुश्किल था। पुलिस की वजह से ही उन्होंने ‘दूसरा जन्म’ लिया है। अनिल के पिता अबिनाशी अरोड़ा ने बेटे की सकुशल वापसी की खुशी में गाजियाबाद पुलिस की टीम को स्वेच्छा से 1.51 लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की है। परिजन पुलिस अधिकारियों को सम्मानित भी करेंगे। वहीं एसएसपी ने पुलिस टीम को 25 हजार का इनाम देने की घोषणा की है। पुलिस के उच्चाधिकारी भी टीम को पुरस्कृत करेंगे।
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ऐसे हुआ था अपहरण
उद्यमी अनिल अरोड़ा ने बताया कि 25 जनवरी की रात राशिद उनके पास फैक्ट्री में आया और कहा कि कोई पार्ट्स बनवाने हैं। उनकी फैक्ट्री में पूर्व में काम कर चुके राशिद ने कहा कि बाहर कार में एक साहब बैठे हैं, उनके पास चलकर काम समझ लो। अनिल बाहर गए तो राशिद ने कार में बैठाकर बात करने लगे। इसी दौरान एयरफोर्स जवान प्रदीप कार को मेरठ रोड पर ले गया। अनिल ने बताया कि शक होने पर उन्होंने कहा कि वह बाद में बात कर लेंगे फिलहाल उन्हें वापस फैक्ट्री पर छोड़ दें। इस पर तीनों अपहरणकर्ता कार वापस फैक्ट्री पर ले गए और गति धीमी की, लेकिन बाद में उनका मन पलट गया और वह उसे बंधक बनाकर ले गए। तीनों बदमाशों ने अनिल की पिटाई की और मुरादनगर के पास जाकर उसके हाथ, पैर और मुंह पर टेप लगा दी। बेहोश होने पर टेप हटाई। अनिल के मुंह पर सूजन भी है। अनिल ने बताया कि 44 घंटे तक बदमाशों ने उन्हें खाना तक नहीं खिलाया। वह दो दिन तक भूखे रहे। बदमाशों ने उनकी जेब से सारे रुपये भी निकाल लिए और एटीएम कार्ड लेकर उसी को स्वैप कराकर कार में पेट्रोल भी भरवाया था।
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