मेट्रो फेज-3 की शासन से फंडिंग की मांग करेगा जीडीए
गाजियाबाद। नोएडा से मोहननगर तक प्रस्तावित मेट्रो फेज-3 कॉरिडोर में जीडीए शासन से फंडिंग की मांग करेगा। लखनऊ, वाराणसी, इलाहाबाद सहित अन्य प्राधिकरणों के मेट्रो प्रोजेक्टों को शासन की ओर से फंडिंग का हवाला देकर जीडीए भी फंडिंग के लिए अपना पक्ष रखेगा। मेट्रो फेज-3 की वर्तमान में संशोधित डीपीआर पर काम जारी है। इसमें मेट्रो फेज-3 कॉरिडोर के वसुंधरा सेक्टर-2 (निकट साहिबाबाद) पर बनने वाले मेट्रो जंक्शन से रैपिड रेल स्टेशन को एलिवेटेड पैदल पार पथ (वॉक-वे) से जोड़ा जाना है।
वॉक-वे की लंबाई को सीमित करने के लिए डीएमआरसी और एनसीआरटीसी की ओर से ले-आउट पर काम किया जा रहा है। बता दें कि नोएडा से मोहननगर फेज-3 मेट्रो और वैशाली से साहिबाबाद मेट्रो फेज-4 कॉरिडोर का वसुंधरा सेक्टर-2 पर जंक्शन प्रस्तावित है। जंक्शन के पास ही साहिबाबाद में रैपिड रेल का स्टेशन बनना है। जीडीए, डीएमआरसी व एनसीआरटीसी की योजना एलिवेटेड पैदल पथ के जरिए वसुंधरा सेक्टर-2 में मेट्रो जंक्शन को रैपिड रेल स्टेशन से जोड़ने की है। साहिबाबाद के इस जंक्शन से साहिबाबाद में रैपिड रेल स्टेशन की दूरी अभी करीब 600 मीटर है। इसके कम करके 200 करने की तैयारी है। ले-आउट में परिवर्तन करके ही दूरी को कम किया जा सकता है।
1866 करोड़ का प्रोजेक्ट, शासन से फंडिंग पर मिलेगी राहत
नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी से मोहननगर तक प्रस्तावित मेट्रो फेज-3 कॉरिडोर की संशोधित डीपीआर में लंबाई 5.91 किमी है। 1866 करोड़ के इस ोर में कुल छह स्टेशन होंगे। फेज-3 कॉरिडोर में वैभवखंड, डीपीआर इंदिरापुरम, शक्ति खंड, वसुंधरा सेक्टर-5, मोहननगर में से सबसे महत्वपूर्ण वसुंधरा सेक्टर-2 स्टेशन है। ऐसे में इस कॉरिडोर में लखनऊ, इलाहाबाद व अन्य प्राधिकरणों के मेट्रो प्रोजेक्ट की तर्ज पर अगर शासन फंडिंग करता है तो जीडीए को बड़ी राहत मिलेगी। ऐसे ही वैशाली से साहिबाबाद का मेट्रो फेज-4 कॉरिडोर वसुंधरा सेक्टर-2 मेट्रो स्टेशन से जुड़ना है। फेज-3 में अगर शासन फंडिंग करता है तो फेज-4 को भी इसका लाभ मिलेगा।
फंडिंग पैटर्न के चलते लेट हुआ था मेट्रो फेज-2 प्रोजेक्ट
दिलशाद गार्डन से शहीद स्थल मेट्रो फेज-2 कॉरिडोर में फंडिंग पैटर्न के चलते प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य एक साल की देरी से पूरा हो सका था। फाइनल डीपीआर में यह प्रोजेक्ट करीब 1782 करोड़ का बैठा था। लेकिन जीडीए, यूपीएसआईडीसी, आवास विकास परिषद के बाद नगर निगम के अंशदान में काफी देरी हुई। शासन के फैसले से नगर निगम का अंशदान भी बाद में जीडीए को देना पड़ा। ऐसे में फिर से अगर यही पैटर्न लागू होता है तो प्राधिकरण को फिर से नुकसान उठाना पड़ सकता है।
लखनऊ सहित अन्य प्राधिकरणों के मेट्रो प्रोजेक्ट की तर्ज पर मेट्रो फेज-3 कॉरिडोर को फंडिंग किए जाने की मांग प्राधिकरण शासन से करेगा। - कंचन वर्मा, उपाध्यक्ष, जीडीए