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कांग्रेस, बसपा-बसपा के साथ से भी छोटे चौधरी की नहीं बनी बात

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कांग्रेस, बसपा, सपा के साथ से भी छोटे चौधरी की नहीं बनी बात
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गाजियाबाद। मोदी मैजिक चला तो रालोद फिर से अपने गढ़ में भी हार गई। इससे बेहतर समीकरण शायद ही अब अगले लोकसभा चुनाव में बने। इस बार रालोद से सपा-बसपा ने तो गठबंधन किया ही, कांग्रेस ने भी सामने प्रत्याशी न उतारकर चौधरी अजित सिंह और जयंत चौधरी का खुलकर साथ दिया। छोटे चौधरी अपना गढ़ नहीं बचा पाए। कांग्रेस अपना प्रत्याशी उतार देती तो रालोद के लिए परिणाम और खराब हो सकते थे। अब रालोद का संगठन हार की समीक्षा कर 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी करने पर ध्यान दे रहा है।
बागपत लोकसभा क्षेत्र में छपरौली, बागपत और सिवालखास विधानसभा में तो रालोद को अच्छे खासे वोट मिले, लेकिन मोदीनगर ने लुटिया डुबो दी। मोदीनगर में रालोद को महज 12 हजार वोट मिले। यहां वोटर भाजपा पर ज्यादा मेहरबान दिखे। 2012 से 2017 तक यहां सुदेश शर्मा रालोद के विधायक रहे हैं। 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्हें मोदीनगर के शहरी क्षेत्र से करीब 20 हजार वोट मिले थे। इससे पहले 2001 के नगर पालिका अध्यक्ष चुनाव में उन्हें करीब 27 हजार वोट मिले थे, जबकि उस वक्त इस क्षेत्र में वोटरों की संख्या भी कम थी। 2017 में वह फिर से चेयरमैन का चुनाव लड़े तो इस चुनाव में भी उन्हें करीब 19 हजार वोट मिले थे, लेकिन लोकसभा चुनाव में रालोद महज 12-13 हजार वोटों पर सिमट गई। यही बागपत लोकसभा में रालोद और जयंत चौधरी की हार का कारण बन गई। सुदेश शर्मा भी इस बार जनसमर्थन को वोटों में तब्दील नहीं करा पाए।
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2014 के चुनाव में मोदीनगर में तीसरे नंबर पर थी रालोद
2014 के लोकसभा चुनाव में अजित सिंह अपने गढ़ बागपत से चुनाव हार गए थे। वह बागपत लोकसभा की दो विधानसभा क्षेत्र छपरौली और बड़ौत में दूसरे नंबर पर रहे थे, जबकि मोदीनगर, सिवालखास और बागपत विधानसभा में अजित सिंह तीसरे नंबर पर रहे थे। सिवालखास और बागपत विधानसभा में सपा के गुलाम मोहम्मद और मोदीनगर विधानसभा में बसपा के प्रशांत चौधरी दूसरे नंबर पर रहे थे।
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कोट
2019 का लोकसभा चुनाव रोजगार, विकास कार्यों, किसानों की समस्याओं के मुद्दों से भटका दिया गया। भाजपा ने इस चुनाव में राष्ट्रवाद और धर्म का पुरजोर इस्तेमाल किया और चुनाव जीत लिया। धनबल और सत्ताबल का दुरुपयोग किया गया। मोदीनगर देहात क्षेत्र में रालोद ने अच्छा प्रदर्शन किया है। व्यक्तिगत वोट भी मिला है। हार-जीत अलग बात है। - सुदेश शर्मा, पूर्व विधायक रालोद
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बागपत और मुजफ्फरनगर में ऐसे परिणामों की उम्मीद नहीं थी। बागपत में बड़े मार्जिन से जयंत चौधरी की सीट निकलने की उम्मीद थी। परिणाम उम्मीदों के विपरीत आए तो इसकी समीक्षा जरूर की जाएगी। समीक्षा में अगर कुछ कमजोरी निकलती है तो विधानसभा चुनाव से पहले इन पर काम किया जाएगा। - इंद्रजीत सिंह टीटू, प्रदेश प्रवक्ता, रालोद
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