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मुआवजा देने को जीडीए ने हुडको से मांगा 1232 करोड़ का कर्ज

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मुआवजा देने को जीडीए ने ‘हुडको’ से मांगा 1232 करोड़ का कर्ज
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आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे जीडीए की हालत अब खस्ताहाल होती जा रही है। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के साढ़े सात सौ करोड़ रुपयों के कर्ज का पुरसाहाल नहीं मिल रहा, उस पर हालात इस कदर बिगड़े हैं कि जीडीए को अब अपने हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए भी भारी भरकम कर्ज की दरकार है।

किसानों को मधुबन-बापूधाम योजना को ली जाने वाली 281 एकड़ भूमि का मुआवजा देना है। जीडीए ने अब हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कारपोरेशन से 1232 करोड़ रुपये उधार मांगे हैं।
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1234 एकड़ वाली मधुबन बापूधाम योजना के लिए जीडीए ने पांच गांव सदरपुर, मैनापुर, मोरटा, नंगला पाट और याकूतपुर की जमीन का अधिग्रहण किया था। वर्ष 2008 में योजना से प्रभावित करीब 800 एकड़ जमीन का मुआवजा 1100 रुपये प्रतिवर्ग मीटर के हिसाब से बांट दिया गया।

बाकी बची जमीन में से 281 एकड़ जमीन के मालिक किसानों ने मुआवजा राशि बढ़वाने के लिए पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

30 नवंबर 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के हक में फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि जीडीए इस आदेश को एक साल के अंदर इंप्लीमेंट कराए।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद जीडीए पर करोड़ों रुपये की अतिरिक्त देनदारी लगभग तय हो गई है। फैसले को आए लगभग सात माह का समय गुजर चुका है।

ऐसे में अब मधुबन बापूधाम योजना 281 एकड़ जमीन को अधिग्रहण करने के लिए जीडीए ने प्रशासन को लिखा है। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है जीडीए पहले मुआवजा राशि प्रशासन के एकाउंट में जमा कराए, इसके बाद ही अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

उधर, जीडीए वर्तमान समय में आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में खाली एकाउंट वाले जीडीए के पास कर्ज के सिवाय दूसरा रास्ता नहीं है, उसे किसानों को मोटी रकम बतौर मुआवजा देनी है।

जीडीए वीसी कंचन वर्मा ने बताया कि मधुबन बापूधाम योजना में आने वाली 281 एकड़ भूमि बची है। इसके अधिग्रहण के लिए किसानों को बढ़ी हुई दर से पैसा चुकाना होगा।
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इसके लिए जीडीए को करीब 1232 करोड़ रुपये की जरूरत है। जबकि वर्तमान समय में जीडीए के पास इतनी रकम नहीं है। यही कारण है कि अब हुडको से कर्ज मांगा गया है। इसके लिए औपचारिकताएं पूरी होने के करीब है, उम्मीद है कि जुलाई तक उन्हें हुडको से 1232 करोड़ रुपये मिल जाएंगे।
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