आवास विकास ने 49 मकानों को किया सील
प्रताप विहार स्थित कांशीराम आवासीय योजना के 49 मकानों में अनधिकृत रूप से रह रहे लोगों से रविवार को मकान खाली कराए गए। आवास विकास परिषद के अफसरों ने खाली कराए गए मकानों को सील कर दिया।
कुछ दबंग लोगों ने इन मकानों पर वर्षों से कब्जा कर किराए पर दे रखा था। दूसरी ओर, परिषद की इस कार्रवाई से कई परिवारों का अब आशियाना छिन गया है।
आवास विकास परिषद के अधीक्षण अभियंता केए सिंघल के नेतृत्व में विभागीय टीम और पुलिस सुबह करीब 11 बजे कांशीराम कालोनी में पहुंचीं। अधिकारियों ने लोगों को मकान खाली करने का समय दिया, लेकिन वह कार्रवाई का विरोध कर मकान खाली न करने पर अड़ गए।
मकानों में काबिज लोगों की अधिकारियों से जमकर नोकझोंक हुई, हालांकि मौजूद पुलिस ने लोगों को समझाकर शांत कराया। इसके बाद टीम ने इन मकानों में रह रहे लोगों का सामान खुद ही बाहर निकाला और मकानों को सील कर दिया। मकान खाली कराए जाने से बेघर हुए परिवारों की महिलाएं और बच्चे रोने लगे, लेकिन परिषद की कार्रवाई जारी रही।
अधिशासी अभियंता अतुल कुमार सिंह ने बताया कि आवास विकास ने वर्ष 2010-11 में कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना में 1376 मकान बनाए थे। इनमें से 1327 मकान आवंटित कर दिए गए थे।
49 मकानों का आवंटन नहीं हो पाया था। इन मकानों में कुछ लोगों ने कब्जा कर उन्हें किराए पर दे दिया था। आविप अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई से पहले मकान खाली करने के लिए नोटिस दिए गए थे। बावजूद इसके लोगों ने मकान खाली नहीं किए।
कांशीराम आवासीय योजना के इन 49 मकानों को दबंगों ने चार से पांच हजार रुपये प्रतिमाह के किराए पर दिया हुआ था। इससे उन्हें हर माह मोटी कमाई हो रही थी। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने लोगों से पूछा कि वह किराया किसे दे रहे हैं, लेकिन उन्होंने नाम उजागर नहीं किए।
कई महिलाएं उनसे भिड़ गईं, उनका कहना था कि जब मकान किराए पर दिए जा रहे थे तब आवास विकास परिषद के अधिकारी कहां थे। अब वह बच्चों को लेकर कहां जाएं।
कांशीराम आवास में बी-34 के मकान संख्या 536 में एक परिवार के दस्तावेज फर्जी पाए गए। अधिशासी अभियंता अतुल कुमार ने बताया कि इस मकान में रह रहे वीरेंद्र कुमार ने मकान के फर्जी पेपर बनवा रखे थे।
आवंटन पेपर स्कैन किया हुआ था और इस पर कोई मुहर भी नहीं थी। आवंटन पेपर पर फोटो भी किसी और की लगी हुई थी। इस मकान को खाली कराकर सील कर दिया गया है।