आयकर विभाग ने बिल्डर से सरेंडर कराए 35 करोड़
गाजियाबाद। आयकर विभाग को मेरठ स्थिति बिल्डर के ठिकानों पर छापेमारी से बड़ी सफलता हाथ लगी है। करीब 32 घंटे तक चली कार्रवाई के बाद बिल्डर ने 35 करोड़ रुपया सरेंडर किया है। बिल्डर संजीव मित्तल ने माना कि बाजार में लगाया गया धन उसी की है। आयकर रिटर्न में इस धन का उल्लेख नहीं किया गया है। आयकर टीम ने बिल्डर के ठिकानों से जब्त कागजात, डायरी, लेजर बुक, बैंक खातों की पास बुक व लॉकर का रिकार्ड जब्त किया है।
संजीव मित्तल के राजकमल एंक्लेव स्थित ठिकानों से 29 दिसंबर को पुलिस ने 25 करोड़ रुपये की पुरानी नकदी बरामद की थी। नकदी पकड़े जाने के बाद आयकर ने राजकमल एंक्लेव स्थित आवास व ऑफिस को सील कर दिया था। अब जैसे ही संजीव मित्तल कोर्ट के आदेश पर छूटकर आया तो आयकर विभाग ने पिछले हफ्ते आवास व ऑफिस की सील खोली। बिल्डर की मौजूदगी में की गई कार्रवाई से आयकर टीमों ने मौके से लेजर, कच्चे बिल, डायरिया, लोन के कागजात, संपत्ति खरीद-बिक्री के बैनामे, पास बुक, परिजनों के नाम पर खरीदे गए वाहनों व बैंक लाकर का रिकार्ड जब्त किया। आयकर टीम ने आडिट करना शुरू किया तो चौंकाने वाले खुलासा हुआ। रिकार्ड के हिसाब से मौजूदा समय में बिल्डर की करीब 35 करोड़ रुपये की प्रापर्टी व निवेश अतिरिक्त पाई गई। जिसका कोई आयकर रिटर्न नहीं भरा गया। सूत्रों का कहना है कि रिकार्ड के आधार पर काली कमाई का खुलासा हुआ तो बिल्डर ने लिखित में स्वीकार किया कि बाजार में लगा 35 करोड़ उसी का है।
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लिखित में स्वीकार करना ही सरेंडर
नियमानुसार अगर कोई पार्टी लिखित में स्वीकार कर लेती है कि आयकर रिटर्न के अतिरिक्त बाजार में लगाई गई रकम उसी की है तो ऐसी स्थिति में उस रकम को सरेंडर धनराशि मान लिया जाता है। क्योंकि ऐसी रकम पर 100 फीसदी तक पेनल्टी तक का प्रावधान है। उधर. आयकर सूत्रों का कहना है कि बिल्डर को 35 करोड़ के अतिरिक्त भी पैसा जमा करना पड़ सकता है, क्योंकि कई स्थिति में पकड़ी गई धनराशि पर पेनल्टी लगाई जाती है। हालांकि पूरी स्ेिेथति विस्तृत आडिट के बाद ही साफ होगी।