फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रिश्वत के आरोप में जेल गए प्रदूषण विभाग के अधिकारी और बाबू

विज्ञापन
विज्ञापन
रिश्वत के आरोप में जेल गए प्रदूषण विभाग के अधिकारी और बाबू
विज्ञापन

लखनऊ से आई एंटी करप्शन टीम ने दोनों को किया गिरफ्तार
शिकायतकर्ता ने रिश्वत लेते हुए शासन को भेजी थी स्टिंग की वीडियो
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। प्रदूषण विभाग के अफसरों की रिश्वतखोरी के खिलाफ शासन ने बड़ी कार्रवाई की है। एक स्टिंग ऑपरेशन में एनओसी देने के नाम पर रुपये लेते हुए कैमरे में कैद हुए प्रदूषण विभाग के सहायक वैज्ञानिक व एक बाबू को एंटी करप्शन टीम ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
एक शिकायतकर्ता ने पिछले दिनों प्रदूषण विभाग के सहायक वैज्ञानिक अनिल कुमार विश्वकर्मा व बाबू धर्मेंद्र कुमार का रिश्वत लेते हुए स्टिंग किया था और वीडियो शासन को भेजा था। बताया गया कि इन्होंने एनओसी देने के नाम पर 50 हजार रुपये की मांग की थी। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य पर्यावरण अधिकारी डॉ. मौ. सिकंदर ने सोमवार रात बड़ी कार्रवाई की। लखनऊ से आई टीम और डॉ. मौ. सिकंदर ने दोनों भ्रष्ट अफसर व बाबू के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13 और धारा सात के अंतर्गत देहात कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके बाद दोनों को रात में ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इस कार्रवाई से विभाग के अफसरों-कर्मचारियों में हड़कंप मचा है।
विज्ञापन


प्रदूषण विभाग में गहरी हैं रिश्वतखोरी की जड़ें
बायो मेडिकल वेस्ट समेत अन्य एनओसी के नाम पर होती है उगाही
कई बार शिकायतों व डीएम की चेतावनी के बाद भी नहीं सुधरे अफसर
अमर उजाला ब्यूरो।
बुलंदशहर।
प्रदूषण विभाग में रिश्वतखोरी की बात कोई नई नहीं है। पूर्व में भी विभाग के अफसरों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन किसी भी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया। बताया जा रहा है कि ध्वनि, जल और वायु प्रदूषण के मानकों को पूरा करने के नाम पर कुछ अफसर-कर्मचारी जमकर अवैध वसूली करते हैं।
फैक्ट्रियों, अस्पतालों, क्लीनिकों के लिए बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण तथा प्रदूषण की एनओसी के लिए प्रदूषण विभाग के अफसरों को मोटी रिश्वत दी जाती है। आरोप लगते रहे हैं कि शहर में अवैध रूप से फैक्ट्रियों व अस्पतालों को प्रदूषण की एनओसी जारी करने के लिए कुछ अफसर-कर्मचारी संचालकों पर अवैध वसूली के लिए दवाब बनाते हैं। अवैध वसूली का विरोध करने पर अफसर संचालकों को नए-नए कानून बताकर दफ्तर के चक्कर कटवाते हैं। सूत्रों ने दावा किया है कि अफसरों की शह पर आरोपी सहायक वैज्ञानिक अनिल कुमार विश्वकर्मा व बाबू धर्मेंद्र कुमार ही अवैध वसूली के लिए डील करते थे। इस संबंध में क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी जीएस श्रीवास्तव से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन स्विच ऑफ था।
अवैध रूप से चलते पाए गए थे भट्ठे
प्रदूषण विभाग में अवैध वसूली का आलम यह है कि एनजीटी के आदेशों के बाद भी जिले में बिना जिग जैग सिस्टम के 16 भट्ठे चलते पाए गए थे। डिबाई समेत कई क्षेत्रों में एसडीएम ने कार्रवाई करते हुए इन भट्ठों को बंद कराया था।
विज्ञापन

वर्जन
मुख्य पर्यावरण अधिकारी की तहरीर पर सहायक वैज्ञानिक और प्रदूषण विभाग में तैनात बाबू के खिलाफ कोतवाली देहात में रिपोर्ट दर्ज की गई। इसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
- मुनीराज जी., एसएसपी बुलंदशहर
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें