एक कमरे पर 1.19 लाख टैक्स लगाकर इंस्पेक्टर बोला ‘आओ सेटिंग कर लें’
गाजियाबाद। नगर निगम में हाउस टैक्स के नाम पर बड़ा ‘खेल’ किया जा रहा है। सिटी जोन के राजनगर एक्सटेंशन क्षेत्र में एक टैक्स इंस्पेक्टर ने महज 10 फीट चौड़े कमरे पर 1.19 लाख का हाउस टैक्स लगा दिया। भवन मालिक ने विरोध किया तो सिटी जोन के टैक्स इंस्पेक्टर ने टैक्स की रकम घटाकर 30 हजार रुपये करने का ऑफर दिया, लेकिन इसके लिए बकाया रकम का 50 फीसदी हिस्सा घूस में मांगा। पीड़ित ने निगम पार्षद से शिकायत की तो मामला पकड़ में आया। पार्षद ने नगर आयुक्त और महापौर को दस्तावेज भेजे हैं और मामले की जांच कराकर टैक्स इंस्पेक्टर पर कार्रवाई की मांग की है।
विजय कुमार बंसल का राजनगर एक्सटेंशन क्षेत्र के सद्दीक नगर में 200 गज का प्लॉट है। इस पर उन्होंने बीते साल 10 बाई 10 का एक दफ्तर बनाया है। सितंबर 2018 में उन्होंने यहां बिजली का कनेक्शन लेकर काम करना शुरू किया। अप्रैल 2019 में नगर निगम के सिटी जोन के टैक्स विभाग के कर्मचारियों ने उनके पास 1.19 लाख का टैक्स बिल भेजा। इसमें 1 लाख 182 रुपये बकाया दर्शाया गया है। इस बकाया राशि पर 12 हजार रुपये ब्याज भी लगाया गया है। एक दफ्तर का 1.19 लाख का बिल देखकर विजय कुमार का सिर चकराया तो वह जोनल कार्यालय पहुंचे। आरोप है कि यहां एक व्यक्ति उन्हें अनिल कुमार नाम के टैक्स इंस्पेक्टर के पास लेकर पहुंचा। अनिल ने उन्हें ऑफर दिया टैक्स कम तो हो जाएगा, लेकिन 30-32 हजार रुपये नगर निगम में जमा कराना होगा और बाकी रकम में से आधा-आधा हिस्सा कर लेंगे। यानी करीब 45 हजार रुपये उन्हें घूस में टैक्स इंस्पेक्टर को देनी थी। उन्होंने इंकार कर दिया और अपने परिचित पार्षद राजेंद्र त्यागी से शिकायत की। उन्होंने नगर आयुक्त दिनेश चंद्र को टैक्स में चल रहे इस खेल के दस्तावेज भेजे हैं। महापौर आशा शर्मा का कहना है कि अभी शिकायत नहीं मिली है। शिकायत मिलने पर मामले की जांच कराई जाएगी और कार्रवाई की जाएगी।
वसुंधरा और शालीमार गार्डन में भी पकड़ा गया था टैक्स का खेल
हाउस टैक्स का घोटाला पहले भी सामने आ चुका है। बीते दिनों वसुंधरा सेक्टर-4 में एक मकान पर 45 हजार रुपये टैक्स लगाया गया था। उसी के बगल वाले एक जैसे मकान पर महज 11 हजार रुपये टैक्स लगा दिया गया था। सुविधा शुल्क लेकर यह खेल किया गया था। मामला पकड़ा जाने पर टैक्स को ठीक कराया गया। इसके अलावा मोहन नगर जोन के शालीमार गार्डन में भी एक मकान के दो हाउस टैक्स बिल भेजे गए थे। एक बिल में एक लाख से ज्यादा का टैक्स लगाया गया था, दूसरे बिल में महज 6.5 हजार की रकम दर्शायी गई थी। निगम पार्षद मनोज गोयल ने मामला सदन में उठाया तो इसमें जांच बैठाई गई। जांच फाइलों में दब कर रह गई है।