तब कंपनी की ओर से पुलिस बुलाई गई। लिंक रोड थाने की पुलिस ने कर्मचारियों को समझाने का प्रयास किया। काफी देर तक दोनों पक्षों के बीच बात होती रही। आरोप है कि पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर कर्मचारियों को वहां से हटाया।
कर्मचारियों का कहना है कि लॉकडाउन में कारोबार न चलने से परिवार का गुजर-बसर करने में पहले ही दिक्कत आ रही थी। अब कंपनी की तरफ से बैठकी (ले-ऑफ) लागू करने से हालात और बिगड़ जाएंगे। इसे लेकर तमाम कर्मचारी परेशान हैं।
उधर, एटलस कंपनी के सीईओ एनपी सिंह ने फोन पर आर्थिक स्थिति बिगड़ने की बात जरूर कही, लेकिन उन्होंने मामले में और कुछ भी कहने से मना कर दिया।
यूनियन ने लिखा प्रमुख सचिव को पत्र
परेशान कर्मचारियों ने मामले की शिकायत श्रम विभाग के प्रमुख सचिव और गाजियाबाद के श्रमायुक्त को पत्र लिखकर की है। संगठन का कहना है कि कंपनी ने बिना किसी पूर्व सूचना से अचानक ले-ऑफ लागू कर बोर्ड पर नोटिस चिपका दिया। साथ ही कर्मचारियों को काम करने से गेट पर ही रोक दिया गया।
लिहाजा यह गैर-कानूनी है। चार बिंदुओं में संगठन ने कंपनी पर गलत तरीके से बैठकी करने व कर्मचारियों को परेशान करने का आरोप लगाया। यूनियन ने दोनों पक्षों को बुलाकर राहत देने की मांग की है।
क्या होता है ले-ऑफ?
कंपनी के पास जब उत्पादन के लिए पैसे नहीं होते हैं, तो उस परिस्थिति में कंपनी कर्मचारियों की छंटनी न करके और किसी प्रकार का अतिरिक्त काम ना कराकर सिर्फ उसकी हाजिरी लगवाती है।
कंपनी का कर्मचारी रोजाना गेट पर आकर अपनी हाजिरी नोट कराएगा और उसी हाजिरी के आधार पर कर्मचारी को आधे वेतन का भुगतान किया जाएगा।