उनका आरोप है कि सात दिन बीतने के बाद भी प्रशासन ने कोई सुनवाई नहीं की। जबकि कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से अभिभावकों की समस्या सुनने और उसके निस्तारण की मांग की थी। भूख हड़ताल पर बैठी महिलाओं की हालत बिगड़ रही थी। तीन महिलाओं को अस्पताल में भर्ती भी कराया गया।
बुधवार को पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने भूख हड़ताल पर बैठे लोगों को जबरन उठा दिया। कविनगर थाना पुलिस ने चार लोगों को नामजद व अन्य के खिलाफ सरकारी आदेश की अवहेलना एवं आपदा प्रबंधन अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। चार लोगों को क्वारंटीन किया गया है।
चार साथियों को पुलिस ने किया नजरबंद
हमारे चार साथियों को पुलिस ने नजरबंद किया हुआ है। उनके परिवार वालों को भी सूचना नहीं देने दिया गया। उनमें एक महिला भी है, जो मधुमेह की मरीज हैं। उन्हें सुबह से दवाई भी नहीं दी गयी है। दो दिन पहले ही अस्पताल से भी आई थी। यह पुलिस और प्रशासन की तानाशाही है। सही और सच्चाई के लिए लड़ना अपराध नहीं है। -सीमा त्यागी, अध्यक्ष, गाजियाबाद पैरेंट्स एसोसिएशन
लड़ते रहेंगे लड़ाई
कोरोना संक्रमण के कारण आर्थिक तंगी से जूझ रहे अभिभावकों की आवाज को उठाना यदि गलत है तो हम कार्रवाई के लिए तैयार हैं। सच्चाई के लिए लड़ते रहेंगे। हम लोग शांतिपूर्ण तरीके से भूख हड़ताल और विरोध जता रहे थे। पुलिस और प्रशासन ने हमारी आवाज को दबाने का काम किया है। जबकि प्रशासन और शासन से लगातार न्याय की गुहार लगा रहे हैं। -विवेक त्यागी, मीडिया प्रभारी
हम लोग सरकार और प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि तीन महीने की फीस माफ की जाए। स्कूल शासनादेशों का उल्लंघन कर रहे हैं। फीस जमा न होने पर बच्चों के नाम काटे जा रहे हैं। पुलिस प्रशासन को जहां कार्रवाई करनी चाहिए वहां नहीं की जा रही है। अभिभावकों की आवाज को दबाने का काम किया जा रहा है। स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। -जगदीश विष्ट, उपाध्यक्ष
चार नामजद समेत अन्य अज्ञात पर सरकारी आदेश की अवहेलना, आपदा प्रबंधन अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। चार लोगों को क्वारंटीन भी किया गया है। किसी को नजरबंद नहीं किया गया है। -अभिषेक वर्मा, एसपी सिटी