एमसीडी के अनुसार, नौ हजार लीटर क्षमता वाले 38 वाटर स्प्रिंकलर सड़कों पर तैनात होंगे। ये वाहन शाहदरा (उत्तरी) समेत विभिन्न अनुरक्षण प्रभागों और धूल प्रदूषण के लिहाज से चिन्हित हॉटस्पॉट क्षेत्रों में नियमित रूप से तैनात किए जाएगे। इनका प्रमुख कार्य सड़कों पर जमा धूल को दबाना, सड़क की धुलाई करना और प्रदूषण संभावित क्षेत्रों में उड़ने वाले धूल कणों को नियंत्रित करना है। इसके अलावा इनका उपयोग एमसीडी की अन्य सफाई और अनुरक्षण गतिविधियों में भी किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, ट्रायल के तौर पर इन मशीनों के संचालन के लिए छह माह का अनुबंध किया गया था, जिसकी अवधि समाप्त हो गई और अब इन मशीनों को तीन वर्ष तक सड़कों पर तैनात किया जा रहा है। इन मशीनों का संचालन बिना किसी व्यवधान के जारी रहेगा और धूल नियंत्रण अभियान प्रभावित नहीं होगा। एमसीडी का मानना है कि धूल प्रदूषण पर नियंत्रण केवल मैकेनिकल रोड स्वीपिंग से संभव नहीं है। सड़क पर जमा महीन धूल को उड़ने से रोकने के लिए नियमित वाटर स्प्रिंकलिंग भी उतनी ही जरूरी है।
इसी कारण धूल हॉटस्पॉट, व्यस्त यातायात मार्गों, निर्माण गतिविधियों वाले क्षेत्रों और प्रदूषण प्रभावित इलाकों में वाटर स्प्रिंकलरों की तैनाती बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में धूल नियंत्रण की इस व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा, ताकि राजधानी की वायु गुणवत्ता में सुधार लाने, सड़क की धूल को कम करने और नागरिकों को प्रदूषण से राहत दिलाने के प्रयासों को गति मिल सके।