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आयुष्मान भारत के मरीज को जीबी पंत अस्पताल ने दी जुलाई की तारीख, कार्यप्रणाली पर खड़े हुए सवाल

Thu, 07 Mar 2019 05:57 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
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gb pant hospital - फोटो : अमर उजाला
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देश में जहां कार्डियोवास्कुलर यानि दिल से जुड़ी बीमारियां सर्वाधिक मौतों का कारण बन रही हैं। हर दिन 100 से ज्यादा लोगों की हार्ट अटैक से मौत हो रही है। वहीं, राजधानी के जीबी पंत अस्पताल ने दिल की गंभीर बीमारी से जूझ रहे एक मरीज को जुलाई में इलाज की तारीख दी है।
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यूपी के जिला आगरा का निवासी मरीज आयुष्मान भारत के तहत उपचार कराने दिल्ली आया था। पिछले वर्ष दिसंबर माह में जांच के बाद रक्त धमनियों में ब्लॉकेज होने की परेशानी सामने आई थी। लेकिन डॉक्टरों ने जुलाई 2019 में आकर उपचार कराने की तारीख दी है। इसके बाद जीबी पंत अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। 

वहीं, हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने मरीज के तत्काल उपचार को लेकर अस्पताल प्रबंधन को पत्र लिखा है। फाउंडेशन अध्यक्ष व पद्मश्री डॉ. केके अग्रवाल ने बताया कि आगरा जिला निवासी 48 वर्षीय किसान रामदास पांच हजार रुपये प्रति माह कमाते हैं।
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आयुष्मान भारत के तहत उन्हें ई कार्ड भी मिला हुआ है। उन्हें एनजाइना दर्द की शिकायत होने पर डॉक्टरों ने दिल्ली रेफर कर दिया था। यहां जीबी पंत अस्पताल में जांच के दौरान बायीं धमनी में 20 और दायीं धमनी में 100 फीसदी ब्लॉकेज का पता चला। इस स्थिति में मरीज की हार्ट सर्जरी ही एकमात्र बेहतर विकल्प हो सकती है। 

21 जनवरी 2019 को जीबी पंत अस्पताल के डॉक्टरों ने रामदास को जुलाई में आकर ऑपरेशन कराने की सलाह दी है, जबकि ऐसी परिस्थिति में मरीज को तत्काल ऑपरेशन की जरूरत होती है।

डॉ. केके अग्रवाल का कहना है कि धमनियों में ब्लॉकेज होने का मतलब 24 घंटे आपात स्थिति की आशंका बने रहना। इस तरह के मरीजों को कभी भी हार्ट अटैक आ सकता है। साथ ही अटैक के दौरान उनके बचने की संभावना भी कम होती है। ऐसी स्थिति में अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा मरीज को लंबी वेटिंग देना उचित निर्णय नहीं है। उन्होंने कहा कि इस बारे में अस्पताल प्रबंधन को फाउंडेशन की ओर से पत्र भेजा गया है। आयुष्मान भारत योजना का लाभार्थी होने के बाद भी मरीज को समय पर उपचार नहीं मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है।
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