जांच दर बढ़ाना स्वास्थ्य विभाग के लिए सरदर्द बन गया है। सरकारी अफसराें ने इसे लेकर जमीन पर जोर आजमाइश शुरू कर दी है। बृहस्पतिवार को स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने सेक्टर-60 स्थित निजी कंपनी में संचालित कॉल सेंटर में लैब संचालक की बैठक बुलाई।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने बताया कि करीब 25 लैब जनपद के कोरोना जांच से जुड़ी हैं। सभी के संचालकों को बुलाया, लेकिन 15 लैब संचालक बैठक में पहुंचे। लैब संचालकों को निर्देशित किया गया है कि सैंपल आईसीएमआर की गाइडलाइन के अनुरूप लिया जाए। डाटा स्वास्थ्य विभाग दें।
बैठक में आंकड़े देने में हीलाहवाली करने वाले लैब संचालकों को चेतावनी दी, साथ ही गैर हाजिर 10 लैब संचालकों को नोटिस जारी करने की बात स्वास्थ्य विभाग ने कही है।
जांच में क्यों फेल सरकारी महकमा
सरकारी लैबों की रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को मिलती है। जबकि निजी लैबों का केवल पॉजीटिव मरीजों का आंकड़ा विभाग को मिल पाता है। शेष आए निगेटिव मरीजों की रिपोर्ट निजी लैब संचालक स्वास्थ्य विभाग को देते ही नहीं है। शासन से दबाव पड़ने पर जबरन रिपोर्ट निजी लैब संचालकों से ली जाती है।
बाद में उसे आंकड़ों में शामिल किया जाता है। ऐसे में अधिकारिक तौर पर जांच दर बढ़ाने में निजी लैबों का खास योगदान नहीं है। इसके अलावा एनआईबी पर पश्चिमी यूपी और कई राज्यों की जांच का भार है। जिम्स, चाइल्ड पीजीआई में भी काफी संख्या में पड़ोसी जिलों के सैंपल जांच के लिए पहुंच रहे हैं।
3 जून - 25 केस
2 जून- 26 केस
1 जून- 17 केस
31 मई- 51 केस
30 मई- 18 केस
29 मई- 10 केस
28 मई- 11 केस
27 अप्रैल से 3 मई तक की स्थिति
3 मई- 8
2 मई- 5
1 मई- 10
30 अप्रैल- 7
29 अप्रैल- 3
28 अप्रैल- 5
27 अप्रैल- 14
(नोट: आंकड़े दो अलग-अलग सप्ताह के हैं। अप्रैल के अंत और मई की शुरुआत में जांच दर 120 सैंपल प्रतिदिन की रही, लेकिन कोरोना के केस कम रहे। वहीं, मई के अंत और जून की शुरुआत में कोरोना का ग्राफ तेजी से बढ़ा है, लेकिन जिले की जांच दर करीब 120 सैंपल प्रतिदिन रही है।)
लैब संचालकों को कोरोना जांच की पूर्ण रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। जनपद में कई सरकारी लैबों में कोरोना की जांच हो रही है। जांच दर में तेजी लाई जा रही है।- डॉ. दीपक ओहरी, सीएमओ