वैसे तो छात्र संगठनों की ज्वाइंट एक्शन कमेटी के आह्वान पर देश भर से जुटे छात्रों के बीच पहुंचे राजनैतिक दल रोहित वेमुला को न्याय दिलाने के लिए आए थे, लेकिन राजधानी में उनका मुख्य फोकस जेएनयू मुद्दे पर ही रहा।
एक की मंच पर पहुंचे अलग-अलग दलों व विचारधारा के नेताओं राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, वृंदा करात, योगेंद्र यादव आदि ने यहां से मोदी सरकार को युवा विरोधी करार दिया।
असल में जब रोहित मामले पर दिल्ली चलने की कॉल दी गई, उस समय पर जेएनयू विवाद था ही नहीं। लेकिन, इसके बाद हुआ जेएनयू मुद्दा आज की सभा में भारी रहा। जबकि रैली व सभा स्थल पर पोस्टर रोहित वेमुला व उससे संबंधित ही थे।
जंतर-मंतर पर जुटे तमाम नेताओं ने मंच पर मौजूद रोहित की मां राधिका वेमुला को अपने संबोधन में जगह तो दी, लेकिन मुख्य फोकस जेएनयू ही रहा।
एक ही मंच पर दिखाई दिए धुर-विरोधी
इतना ही नहीं, राजनीति में धुर विरोधी रहे राहुल, केजरीवाल, योगेंद्र यादव सहित वामपंथियों के इस मंच पर स्वर एक ही दिखाई दिए। यह बात अलग है कि राहुल, केजरीवाल या योगेंद्र इस मंच पर एक समय में नहीं रहे।
सबसे पहले राहुल आए और भाषण देकर चले गए। इसके बाद योगेंद्र यादव और फिर केजरीवाल आए। नेता ही नहीं, नीचे बैठे अलग-अलग संगठनों के कार्यकर्ता भी अपने नेता के साथ यहां से जाते दिखे।
सूत्रों के अनुसार, इन नेताओं ने एक दूसरे नेता के मंच पर सामना न होने की कोशिश के तहत ही अपना आना निर्धारित किया। सिर्फ वृंदा करात, डी राजा व अन्य वामपंथी नेता वहां पूरे समय मंच पर मौजूद रहे।
दरअसल, रोहित मामले पर युवाओं को समझाने के लिए गैर भाजपाई दल के ये बड़े नेता यहां पर पहुंचे थे। केजरीवाल ने तो अपने भाषण में युवा वोटर को टारगेट करते हुए साफ कर दिया कि नरेंद्र मोदी को देश के युवाओं ने ही प्रधानमंत्री की कुर्सी दिलाई है, लेकिन वह याद रखें कि अगर युवाओं को परेशान किया गया तो यही युवा आपकी कुर्सी हिला देगा।