दिल्ली में सिलिंडर की कालाबाजारी थम नहीं रही। भले ही सरकार ने कालाबाजारी रोकने के लिए पूरी दिल्ली में विजिलेंस की टीम तैनात कर रखी हो, लेकिन सरकार की ढीली जांच व्यवस्था के चलते सिलिंडरों की कालाबाजारी खुलेआम की जा रही है।
सरकारी दावों की पड़ताल करने जब अमर उजाला की टीम निकली तो लोगों ने बताया कि एलपीजी सिलिंडर की डिलिवरी नहीं हो रही और अगर हो भी रही है तो डिलीवरी मैन 500 से 700 रुपये अतिरिक्त मांग रहे हैं। इतना ही नहीं जो सिलिंडर आ रहा उसमें 5 से 6 किलो गैस कम आ रही। इस वजह से लोग कतार में खड़े होने के लिए मजबूर हैं।
सिलिंडर के लिए कतार लगाने को नहीं जा रहे काम
विवेक विहार स्थित एक गैस एजेंसी में सिलिंडर लेने आई राज रानी ने बताया कि डिलिवरी मैन सिलिंडर डिलिवरी के नाम पर 500 से 700 रूपये अतिरिक्त शुल्क मांगते हैं इसलिए वह काम छोड़कर खुद सिलिंडर लेने आई हैं। जब उनसे पूछा गया कि आपने शिकायत नहीं कि तो उन्होंने कहा सिलिंडर मिल रहा है यह कम है क्या।
आधे दिन की छुट्टी लेकर सिलिंडर लेने विश्वास नगर स्थित गैस एजेंसी में सिलिंडर लेने आए मनीष ने आरोप लगाया कि घर पर जो सिलिंडर डिलिवरी होती है उसमें 4 से 5 किलो गैस कम होती है, जिससे काफी नुकसान हो रहा है इसलिए काम छोड़कर वह खुद गैस लेने आये हैं। यमुनापार स्थित एक गैस एजेंसी में रामदास ने एजेंसी वालों पर उनका सिलिंडर न देकर ब्लैक करने का आरोप लगाकर झगड़ा करना शुरू कर दिया। लेकिन एजेंसी वाला इस बात से अपना पल्ला झाड़ता नजर आया।
भइया हम तो सिलिंडर डिलिवरी कर रहे हैं अब कोई खुद से सिलिंडर लेने आ रहा है तो उसको हम रोक तो नहीं सकते हैं।
-करन पाल, डिलिवरी मैन
नहीं रुक रहा पलायन
एलपीजी संकट का असर अब मजदूरों की जिंदगी और रोजगार पर दिखाई देने लगा है। राजधानी की विभिन्न लेबर मंडियों में गैस संकट के कारण मजदूरों की संख्या में कमी देखी जा रही है। सुबह-सुबह काम की तलाश में जुटने वाले मजदूरों की भीड़ अब पहले जैसी नहीं रही। बताया जा रहा हैं कि एलपीजी संकट के चलते मजदूरों का पलायन जारी है और जो मजदूर बचे हैं, वो भी पलायन की बात कह रहे हैं।
ठेकेदारों ने भी मजदूरों के पलायन की पुष्टि की है। ठेकेदारों व स्थनीय लोगों का कहना है कि पहले जहां सुबह बड़ी संख्या में मजदूर मिल जाते थे, अब उतने मजदूर नहीं मिल रहे। इलाके की लेबर मंडियों में पहले की तुलना में काफी कम भीड़ नजर आ रही है।