एमसीडी और ऑयल इंडिया लिमिटेड के बीच कम्प्रेस्ड बायो-गैस बनाने वाले दो संयंत्र स्थापित करने का समझौता
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली में कचरे के पहाड़ और लैंडफिल के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए एमसीडी ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और महापौर प्रवेश वाही की मौजूदगी में बृहस्पतिवार को एमसीडी और ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) के बीच गीले कचरे से कम्प्रेस्ड बायो-गैस (सीबीजी) बनाने वाले दो संयंत्र स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। तेहखंड और ओखला में बनने वाले इन दोनों संयंत्रों की संयुक्त क्षमता 800 टन प्रतिदिन होगी।
एमओयू के तहत तेहखंड में 10 एकड़ जमीन पर 500 टीपीडी और ओखला में सात एकड़ में 300 टीपीडी क्षमता का संयंत्र लगाया जाएगा। यहां स्रोत पर अलग किए गए गीले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण कर सीबीजी और जैविक उर्वरक तैयार किया जाएगा। इससे गीले कचरे का उपयोग ऊर्जा और कृषि उपयोगी संसाधन में करने के साथ लैंडफिल पर जाने वाले कचरे की मात्रा घटाने का लक्ष्य है। एमसीडी के अनुसार करीब 7,500 टन कचरे का मौजूदा समय में चार वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्रों और इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड के बायोगैस संयंत्र के जरिए प्रसंस्करण हो रहा है। नए संयंत्र गीले कचरे के प्रसंस्करण की क्षमता बढ़ाएंगे।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि ठोस कचरा प्रबंधन दिल्ली की पुरानी शहरी चुनौतियों में शामिल है और इसके समाधान के लिए केंद्र, दिल्ली सरकार, स्थानीय निकाय, सार्वजनिक उपक्रम, निजी क्षेत्र और नागरिक समाज को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि एनडीडीबी के साथ गोबर के वैज्ञानिक प्रबंधन के बाद ओआईएल के साथ यह समझौता गीले कचरे के बेहतर उपयोग की दिशा में अगली कड़ी है।
महापौर प्रवेश वाही ने कहा कि तेहखंड और ओखला के संयंत्र लैंडफिल का दबाव कम करने के साथ स्वच्छ ईंधन और जैविक खाद के उत्पादन में मदद करेंगे।