नगर पालिका शहर की सफाई व्यवस्था पर हर माह लाखों रुपये खर्च करता है लेकिन इसके बाद भी शहर में जगह-जगह गंदगी के ढेर आपको देखने को मिल जाएंगे। वजह है कि नपा के सफाई कर्मचारी अफसरों और नेताओं की कोठियों को चमकाने में लगे हैं।
जिससे क्षेत्र में गंदगी की समस्या बढ़ रही है। वहीं प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान को भी पलीता लग रहा है। बता दें कि नगरपालिका में इस समय 27 सफाई कर्मचारी नियमित तो 35 सफाई कर्मचारी अनुबंध के तौर पर काम कर रहे हैं।
नियमित सफाई कर्मचारियों को 30 से 32 हजार रुपये प्रतिमाह तनख्वाह मिलती है तो अनुबंध पर काम करने वाले सफाई कर्मचारी को दस से 11 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है। इस तरह से शहर की सफाई व्यवस्था पर नगरपालिका का प्रतिमाह लगभग 18 लाख रुपया खर्च होता है।
शहर की सफाई व्यवस्था में हर माह लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी चौपट हुई पड़ी है। यदि आंकलन करें तो प्रतिमाह नगरपालिका का ढाई लाख रुपये से ज्यादा पैसा नेताओं एवं अधिकारियों की कोठियों को साफ करने वाले कर्मचारियों पर खर्च हो जाता है।
यदि शहर के गंदे पानी की निकासी के लिए बने नालों की बात करें तो सारे गंदगी, कीचड़ से अटे पड़े हैं। जिनकी सफाई न होने से गंदे पानी की निकासी सही तरह से नहीं हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत -स्वस्थ भारत अभियान की भी नपा के अधिकारियों को कतई भी चिंता नहीं है।
पार्षद उर्मिला बंसल, मुके श सैनी, सुमन देवी ने आरोप लगाया कि नपा के अधिकारी नेताओं की चमचागिरी में लगे हैं। उन्होंने कहा शहर की सफाई पहले है। इसलिए जिन सफाई कर्मचारियों को नेताओं एवं अधिकारियों की कोठियों पर सफाई के लिए लगाया हुआ है उनको वहां से बुलाकर शहर की सफाई में लगाना चाहिए।
शहर की सफाई को दुुरुस्त करने के लिए विशेष अभियान शुरू किया जा रहा है। यह मेरे संज्ञान में नहीं है कि नपा के सफाई कर्मचारी नेताओं एवं अधिकारियों की कोठी पर सफाई कर रहे हैं। यदि ऐसा है तो उनको वहां से तुरंत हटाकर शहर की सफाई में लगाया जाएगा।-पंकज जून, सचिव नगरपालिका, फिरोजपुर झिरका।