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सिंघु बॉर्डर पर लगा कूड़े का अंबार, हरियाणा और दिल्ली सरकार के इंतजाम नाकाफी

Sat, 12 Dec 2020 02:17 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

  • सफाई कराने में लापरवाही बरत रहा है स्थानीय प्रशासन
  • किसानों को खुद ही करने पड़ रहे हैं सफाई के इंतजाम
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फेंके गए मास्क हटाता एक कर्मी... - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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आंदोलन में हजारों किसानों की सिंघु बॉर्डर पर मौजूदगी से आसपास कूड़े की सफाई बड़ी समस्या बन गई है। कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े किसान एक पखवाड़े से केंद्र सरकार का विरोध कर रहे हैं। आरोप है कि उन्हें सरकारी एजेंसियों से बहुत कम मदद मिल रही है। सीमा के इर्द-गिर्द रोजाना 20 से अधिक ट्रॉलियों में कूड़ा इकट्ठा होता है। हालांकि, साफ-सफाई के लिए सोनीपत से निगम की टीमें पहुंचती हैं, लेकिन उनकी तरफ से की जा रही सफाई नाकाफी है।

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प्रदर्शन स्थल पर हर ओर कागज, डिस्पोजेबल गिलास और बोतलें, फलों के छिलकों के ढेर, खाना बनाने के दौरान निकलने वाला कचरा और पानी से आसपास अब गंदगी और बदबू का आलम है। करनाल के किसान मलकार सिंह ने कहा कि नगर निगमों के कर्मी रोजाना एक बार आते हैं, लेकिन यह संख्या काफी है।

सफाई के पुख्ता इंतजाम न होने की वजह से किसान खुद ही आंदोलन स्थल पर साफ सफाई कर रहे हैं। बॉर्डर के दोनों ओर किसान और उनके समर्थक खुद ही झाड़ू लगाते हैं और कपड़ों की धुलाई करते हैं। खाने की प्लेट और डिस्पोजेबल गिलास हटा रहे हैं। कूड़े को अगर आसपास फेंका भी जाता है तो इसके लिए ट्रैक्टर चाहिए और कूड़ा कहां फेंके, यह सबसे बड़ी समस्या है। 
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मोबाइल शौचालय भी कम
किसानों का कहना है कि दिल्ली सरकार की ओर से मोबाइल शौचालय तो लगाए गए हैं, लेकिन वह भी नाकाफी हैं। फिरोजपुर के किसान भजन सिंह ने कहा कि किसानों ने अपने कपड़ों को धोने के लिए लॉड्री की शुरुआत की है, लेकिन उससे निकलने वाले पानी की निकासी की भी उचित व्यवस्था नहीं है।

मशीनों के संचालन के लिए ट्रैक्टर की बैटरियों का उपयोग किया जा रहा है। कपड़ों की सफाई में सहयोग कर रहे जगजीत सिंह ने कहा कि वॉशिंग पाउडर भी दान में दिए जा रहे हैं, लेकिन कर्मियों की कम संख्या होने की वजह से भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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