संवाद न्यूज एजेंसी
पूर्वी दिल्ली। गांधी नगर बाजार में मूलभूत सुविधाओं की कमी और अव्यवस्थाओं से व्यापारी परेशान हैं। जर्जर सड़कें, जगह-जगह गड्ढे, अतिक्रमण और भीषण जाम ने व्यापार पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है।
बुधवार को गांधी नगर स्थित रघुवर पुरा मार्केट में अमर उजाला संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान व्यापारियों ने समस्याओं को खुलकर रखा। व्यापारियों का कहना है कि बाजार में सुरक्षा की स्थिति भी चिंताजनक है। जेब तराशों और लुटेरों के कारण ग्राहक और दुकानदार दोनों असुरक्षित महसूस करते हैं। व्यापारियों की मांग है कि पूरे बाजार में एफआरएस (फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम) कैमरे लगाए जाएं, ताकि अपराधियों पर नजर रखी जा सके। साथ ही बताया कि बदमाश अक्सर धारदार हथियारों के साथ घूमते हैं और विरोध करने पर हमला भी कर देते हैं। वहीं, बाजार में शौचालयों की कमी और उनकी बदहाल स्थिति पर नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि हजारों लोगों की भीड़ वाले इस बाजार में केवल एक शौचालय है, जिसकी सफाई भी नियमित नहीं होती।
बाजार में लटकते इंटरनेट तारों को हादसे का कारण बताया। साथ ही जाम की समस्या को दूर करने के लिए मालवाहक वाहनों के प्रवेश का समय तय करने की मांग की। इसके अलावा महंगाई और एलपीजी संकट ने भी व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी और मजदूरों के पलायन से उत्पादन और सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। व्यापारियों ने प्रशासन से जल्द ठोस कदम उठाने की मांग की है, ताकि बाजार की स्थिति सुधर सके और व्यापार को राहत मिल सके।
लोगों से बातचीत -
बाजार में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए एफआरएस कैमरे जरूरी हैं, ताकि अपराधियों पर नजर रखी जा सके। -
पवन जिंदल, प्रधान, रघुवर पुरा शॉपकीपर्स एसोसिएशन।
जेबतराश गिरोह सक्रिय हैं और विरोध करने पर हमला कर देते हैं, जिससे व्यापारी डरे हुए हैं। -
पीयूष जैन, महामंत्री, रघुवर पुरा शॉपकीपर्स एसोसिएशन।
हजारों लोगों वाले बाजार में सिर्फ एक शौचालय है, जिसकी हालत बेहद खराब और अस्वच्छ है। -
देवेंद्र ढिंगरा
दुकानों के पास लटकते इंटरनेट तार हादसे को न्योता दे रहे हैं, शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती। -
विजय कुमार
भीषण जाम से व्यापार प्रभावित हो रहा है, मालवाहक वाहनों के लिए तय समय जरूरी है। -
अजय जैन
एलपीजी संकट और महंगाई से मजदूरों की कमी बढ़ी है, जिससे उत्पादन और व्यापार प्रभावित हुआ है। -
अशोक सैनी