सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सरकार की ओर से दी जाने वाली मुफ्त वर्दी सत्र के पांच माह बाद भी नहीं मिल पाई है। मौलिक शिक्षा विभाग द्वारा फंड जारी न करने के कारण विद्यार्थी पिछले साल के पुराने कपड़े पहनकर स्कूल जाने को मजबूर हैें। जबकि कुछ विद्यार्थी निर्धारित वर्दी की जगह दूसरे कपड़े पहनकर स्कूल आ रहे हैं। वर्दी स्कूलों में कब पहुंचेगी, अधिकारियों के पास इसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं है।
गौरतलब है कि सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों को नि:शुल्क वर्दी उपलब्ध करवाई जाती है। विद्यार्थियों को वर्दी के रूप में 400 रुपये की राशि दी जाती है। जिसके तहत मौलिक शिक्षा विभाग सामान्य जाति व नॉन बीपीएल परिवारों के बच्चों को वर्दी देता है। जबकि सर्व शिक्षा अभियान की ओर से अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों और छात्राओं को वर्दी के लिए राशि दी जाती है। विभाग ने अभी तक जिला स्तर पर वर्दी का बजट नहीं भेजा है।
घोषणा को भी हो चुके 4 माह
14 अप्रैल को यमुनानगर में आयोजित अंबेडकर जंयती के मौके पर मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने विद्यार्थियों की वर्दी राशि को बढ़ाने की घोषणा की थी। इस घोषणा को भी 4 माह बीत चुके हैं। लेकिन अभी तक विभाग ने फंड को लेकर कोई रुचि नहीं दिखाई। मुख्यमंत्री की घोषणा भी हवा-हवाई साबित हो रही है। हालांकि पिछले दिनों शिक्षा मंत्री ने बढ़ी राशि भिजवाने की बात कही थी। लेकिन अभी तक जिला स्तर पर बजट नहीं पहुंचा है।
सरकार ने बढ़ाई वर्दी राशि
शिक्षा मंत्री रामविलास शर्मा वर्दी राशि बढ़ाने का दावा कर रहे है। उनका कहना है कि पूर्ववर्ती सरकार के दौरान पिछले कई वर्षों से स्कूली विद्यार्थियों को वर्दी के लिए दिए जाने वाले भत्ता में बढ़ोतरी नहीं की गई। महंगाई कई गुणा बढ़ चुकी है। ऐसे में वर्तमान राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि वर्दी के लिए दिया जाने वाला भत्ता बढ़ाया जाए। नए निर्णय के अनुसार अब प्रति बच्चा स्कूल वर्दी लागत को प्राथमिक स्तर पर 400 रुपये से बढ़ाकर 800 रुपये और अपर-प्राथमिक स्तर पर 1000 रुपये करने का निर्णय किया है।
अभिभावक रमेश, कालू, वनीता का कहना है कि बच्चों के लिए वर्दी, बूट और जर्सी लेना तो दूर की बात है कि हमें तो परिवार के लिए दो समय की रोटी भी बहुत मुश्किल के साथ नसीब होती है। पहले प्रदेश सरकार 400 रुपये दे देती थी। इसबार वो भी नहीं मिले। पुराने कपड़े पहनाकर बच्चों को स्कूल भेज रहे हेैं।
शिक्षा मंत्री रामविलास शर्मा को प्रशिक्षण शिविर में शिक्षण लेने के बजाय अपने विभाग का जायजा लेना चाहिए। जिससे उनको पता लग सके कि सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी फटी वर्दियां पहनकर स्कूल आते हैं।-राजेश खटाना, युवा कांग्रेसी नेता
प्रदेश सरकार शिक्षा जैसे विषय पर गंभीर नहीं है। वर्दी सत्र से पहले मिलनी चाहिए थी। वर्दी न होने से बच्चों में हीन भावना पैदा होती है।-चत्तर सिंह, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ
स्कूली विद्यार्थियों को वर्दी के लिए दिए जाने वाले भत्ता में बढ़ोतरी की गई है। कितनी राशि बढ़ी है, यह नहीं बता सकती। हालांकि अभी मुफ्त वर्दियां देने के लिए सरकार से बजट नहीं आया है।-सतेंद्र वर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी फरीदाबाद।
इनपुट:
-निर्धारित स्कूलों की संख्या: 175
-विद्यार्थियों की संख्या: 94399
-वर्दी के लिए अनुमानित राशि: करीब आठ करोड़ रुपये