अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने का एलान कर भाजपा ने विधानसभा चुनाव से पहले मास्टर स्ट्रोक खेला है। दरअसल दिल्ली की सत्ता की चाभी एक हद तक इन अनधिकृत कालोनियों के गलियारों में है। करीब तीन दशक बाद ही सही लेकिन केंद्र सरकार के इस फैसले से इन गलियारों में रहने वाले करीब पचास लाख लोगों के दिल में उम्मीदों की एक नई आशा जगी है।
भाजपा ने इस फैसले के बाद अपनी सोशल मीडिया विंग से लेकर कार्यकर्ताओं को लोगों तक इस बात को पुरजोर तरीके से पहुंचाने के निर्देश दे दिए हैं। हालांकि दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनाव ही तय करेगा कि इससे किस दल को कितना फायदा हुआ है।
दिल्ली में इस वक्त करीब 1,900 अनधिकृत कालोनियां है। इनमें से नियमित की जाने वाली करीब 1797 कालोनियों में तकरीबन पचास लाख लोग रहते हैं। दिल्ली में चाहे कांग्रेस की सरकार रही हो या आम आदमी पार्टी की। जिसने भी इन लोगों को अपना बनाने के लिए कुछ किया सत्ता हमेशा उसके पास ही रही।
इस चुनाव में भी आम आदमी पार्टी ने बिजली और पानी मुफ्त करके इन वोटरों को अपने हक में करने की कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है। ऐसे में दिल्ली की इतनी बड़ी आबादी के लिए इतना बड़ा फैसला निश्चित रूप से हलचल मचाने वाला ही है।
दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी कहते हैं कि उनके कार्यकाल की यह अब तक की सबसे बड़ी जीत है। वह लंबे समय से दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले चालीस लाख लोगों को उनका हक दिलाने की बात करते रहे थे। यह उसी का नतीजा है कि मोदी सरकार ने उनकी सुन ली।
दरअसल दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने का मामला बहुत पुराना है। 1993 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने सर्वे करवाकर 1071 कॉलोनी को नियमित कराने की सूची तैयार की थी लेकिन मामला अदालत में चले जाने से इनका नियमन नहीं हो सका।
उसके बाद 2001 में नानावटी आयोग का गठन कर दिल्ली की अनधिकृत कालानियों की पूरी डिटेल रिपोर्ट मांगी गई। 2005 में नानावटी आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि जो कॉलोनियां बन गई हैं उनको नियमित किया जाए और अन्य कालोनियां अब विकसित नहीं की जाए।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का दावा है कि दिल्ली सरकार इस मामले में अभी दो साल का वक्त मांग रही थी। ऐसे में केंद्र सरकार ने खुद आगे बढ़ने का फैसला किया। जबकि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वक्त आरोप-प्रत्यारोप करने का नहीं है। दिल्लीवालों के लिए यह बड़ी खुशखबरी है। केंद्र सरकार अब बस अनधिकृत कालोनियों में रजिस्ट्री भर खोल दे।