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जिनके पास नहीं होते हैं इलाज के पैसे, ये शख्स करता है उनकी मदद

Mon, 07 Mar 2016 09:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
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सरीन 16 साल से गरीब मरीजों की कर रहे हैं मदद
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नोएडा सेक्टर-35 निवासी 85 वर्षीय मोहिंदर सरीन 16 साल से जिला अस्पताल में गरीब मरीजों की सेवा और मदद में जुटे हुए हैं। मरीजों के सीटी स्कैन, एमआरआई समेत विभिन्न तरह की जांच, दवाओं, खानपान और इमरजेंसी की स्थिति में ऑटो तक का किराया वहन करते हैं।
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हर शुक्रवार दो समाजसेवियों के साथ मरीजों की मदद करने के लिए वह अब दिल्ली के एम्स भी जाते हैं। वहीं, रोजाना जिला अस्पताल के पंजीकरण काउंटर पर सुबह से दोपहर 12:30 बजे तक खड़े हो जाते हैं और ऐसे लोग, जिनके पास जांच और इलाज के पैसे जमा करने के लिए नहीं होते हैं, उनकी मदद करते हैं।

इसके अलावा गरीब मरीजों के ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले इंप्लांट की जानकारी डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ भी उन्हें देता है। मूलरूप से लाहौर निवासी सरीन का जन्म 19 जुलाई 1931 में हुआ था।
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16 साल से आर्थिक तौर पर कमजोर रोगियों की मदद कर रहे हैं

उन्होंने बताया कि विभाजन के बाद पिता लाला माधवराम पूरे परिवार को लेकर पठानकोट आकर बस गए। पठानकोट और फिरोजपुर में टिंबर, पेट्रोलियम, चाय आदि का बिजनेस था जो मुंबई तक फैला था।

काफी समय पठानकोट, मुंबई और फिरोजपुर में बिजनेस संभाला। इस बीच दोनों बेटे नोएडा में शिफ्ट हो गए। ऐसे में पत्नी के साथ नोएडा आ गए। नोएडा में शिफ्ट हुए 20 साल हो गए हैं। शुरुआत से ही आर्थिक तौर पर कमजोर रोगियों के इलाज की इच्छा थी।

इसी कारण पठानकोट में टिंबर एसोसिएशन की ओर से एक फ्री डिस्पेंसरी भी खुलवाई। उन्होंने बताया कि नोएडा के जिला अस्पताल में 16 साल से आर्थिक तौर पर कमजोर रोगियों की मदद कर रहा हूं।

खुद की सेविंग के अलावा बेटे और पोते भी मदद करते हैं

रिपोर्ट - फोटो : getty images
शुरुआत में निजी स्वार्थ का आरोप लगाने वाले स्टाफ के विरोध का सामना करना पड़ा, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें सेवाभाव पर विश्वास हो गया। मरीजों की जांच और इलाज में खुद की सेविंग के अलावा बेटे और पोते भी मदद करते हैं। अस्पताल में अब स्वास्थ्य सेवाएं काफी अच्छी हो गई हैं।

एक्सरे अल्ट्रासाउंड समेत तमाम जांच फ्री हैं। गुजरे सालों पर नजर डालें तो मरीज इन जांच का शुल्क चुकाने में सक्षम नहीं थे। अस्पताल में मरीजों को खाना नहीं मिलता था। ऐसे रोगियों की मदद करने में खुशी मिलती थी।

एमआरआई, सीटी स्कैन समेत बड़ी जांच की सुविधा अभी भी जिला अस्पताल में नहीं है। इन मरीजों की कैलाश अस्पताल में यह जांच करवा देता हूं।
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सरीन ने हर शुक्रवार को सुबह एम्स जाना शुरू किया है

एम्स अस्पताल
अस्पताल के सीएमडी और केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा ने इसी सेवा भावना को देखते हुए इन मरीजों को जांच में 50 फीसदी छूट का अस्पताल के स्टाफ को आदेश दे रखा है।

सरकारी अस्पताल में अभी भी मरीजों को तमाम दवाएं नहीं मिल पाती हैं। सीएमएस के हस्ताक्षर पर ऑपरेशन फ्री हो जाते हैं, लेकिन इंप्लांट की व्यवस्था मरीजों के लिए बड़ी चुनौती होती है।

मरीजों को दवाएं और इंप्लांट लाकर दे देता हूं। दो और समाजसेवी आर्थिक तौर पर कमजोर मरीजों की मदद और उन्हें बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए आगे आए हैं। उनके साथ हर शुक्रवार को सुबह एम्स जाना शुरू किया है।
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