शिवम ने बबलू को भरोसा दिलाया कि वह मामले को देख लेगा। इसके बाद शिवम ने धीरे-धीरे अंकिता के नाम पर पीड़ित से चार लाख रुपये ऐंठ लिये। अंकिता के नाम से पीड़ित के पास अक्सर कॉल आते थे। जब बबलू के पास रुपये खत्म हो गए तो उसने पुलिस से शिकायत की। उत्तरी जिला के साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी।
थाना प्रभारी पवन तोमर और व अन्यों की टीम ने टेक्निकल सर्विलांस, सीडीआर और बैंक खातों की जांच की। इसके अलावा शिवम से बातचीत की गई। जांच में पुलिस को पता चला कि शुरुआत में बबलू को कॉल भरतपुर इलाके से आई। लेकिन कुछ दिनों के अंतर के बाद कॉलर की लोकेशन बुराड़ी इलाके की ही आई।
उसके आधार पर पुलिस आरोपी के घर पहुंची तो वह बबलू का दोस्त शिवम ही निकला। उसने अपने दोस्त को ब्लैकमेल करने की बात कबूल कर ली। शिवम ने बताया कि बबलू को ब्लैकमेल करने वालों को उसने कॉल करके धमकाया तो उन्होंने उसे कॉल करना बंद कर दिया। इस बीच उसके दिमाग में बबलू से वसूली की बात आई। आरोपी ने योजना के तहत एक सिमकार्ड खरीदा और उसकी मदद से वह खुद बबलू को ब्लैकमेलर बनकर कॉल करने लगा। बबलू मामला सेटल करने के लिए उसे ही ऑन लाइन रुपये भेजता। वह ब्लैकमेलर को रुपये भेजने की बात कर खुद ही रुपये अपने खाते में ट्रांसफर कर लेता। बदले में बबलू को फर्जी पेटीएम के स्क्रीन शॉट दिखा देता था।