समय पर पहचान और उचित उपचार से लाया जा सकता है सकारात्मक सुधार
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। यदि बच्चा पढ़ाई के दौरान बार-बार ध्यान खो देता है, एक जगह शांत बैठ नहीं पाता या जरूरत से ज्यादा चंचल रहता है, तो इसे केवल शरारत या आदत समझकर नजरअंदाज न करें। विशेषज्ञों का कहना है कि ये लक्षण एडीएचडी (अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर) के संकेत हो सकते हैं। समय पर पहचान और उचित उपचार से बच्चे के व्यवहार, पढ़ाई और सामाजिक विकास में सकारात्मक सुधार लाया जा सकता है।
मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. ओम प्रकाश ने बताया कि एडीएचडी एक न्यूरो-डेवलपमेंटल डिसऑर्डर है, जिसमें बच्चे का ध्यान केंद्रित करने, गतिविधियों को नियंत्रित करने और लंबे समय तक किसी कार्य पर टिके रहने में कठिनाई होती है। कई बार अभिभावक इसे सामान्य शरारत समझ लेते हैं, जिससे सही इलाज में देरी हो जाती है।
डॉ. ओम प्रकाश ने कहा कि यदि बच्चे में छह महीने या उससे अधिक समय तक लगातार ध्यान भटकना, अत्यधिक चंचलता या बिना सोचे-समझे प्रतिक्रिया देने जैसे लक्षण दिखाई दें और इनका असर उसकी पढ़ाई, घर या सामाजिक जीवन पर पड़ रहा हो, तो मनोचिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। समय पर पहचान और व्यावहारिक थेरेपी, काउंसलिंग तथा जरूरत पड़ने पर दवाओं के माध्यम से एडीएचडी को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।
एडीएचडी के प्रमुख लक्षण
पढ़ाई या किसी काम से बार-बार ध्यान भटकना।
एक जगह लंबे समय तक बैठने में कठिनाई।
जरूरत से ज्यादा चंचल या बेचैन रहना।
बिना सोचे-समझे तुरंत प्रतिक्रिया देना।
निर्देशों का पालन करने या काम पूरा करने में परेशानी।