नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर वाईफाई की सुविधा बृहस्पतिवार से मिलनी शुरू हो जाएगी। केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु सुविधा को यात्रियों के लिए समर्पित करेंगे। इस मौके पर रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा समेत रेलवे के अधिकारी उपस्थित रहेंगे।
उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी नीरज शर्मा के अनुसार, आधे घंटे तक वाईफाई की सेवा यात्रियों को मुफ्त मिलेगी। इसके लिए भी पासवर्ड मिलेगा। इसके बाद आधे घंटे का चार्ज 25 रुपये व एक घंटे के लिए 35 रुपये लगेंगे।
आगे उपयोग के अनुसार, चार्ज बढ़ता रहेगा। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर सफल प्रयोग के बाद आनंद विहार, पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से यात्रा करने वाले यात्रियों को भी यह सुविधा मिल सकेगी।
सिर्फ 10 किमी रफ्तार बढ़ाने को खर्चेंगे 16 करोड़
दिल्ली से आगरा के बीच हाईस्पीड को लेकर जनता को बेसब्री से इंतजार है। इस रूट पर मात्र 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार बढ़ाने में ही रेलवे को 16 करोड़ रु पये से अधिक की धनराशि खर्च करनी पड़ रही है।
इसमें ट्रेन के ट्रायल और अधिकारियों के विजिट के खर्च अलग से हैं। अगर दोनों को मिला दिया जाए तो यह 17 करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगा। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब इस ट्रैक की क्षमता पहले से ही 150 किलोमीटर प्रतिघंटे की है तो उसे 160 किमी. करने के लिए जनता की इतनी रकम क्यों फूंकी जा रही है।
रफ्तार और अधिक होती तो जनता को हाईस्पीड का कुछ मतलब समझ में आता। इसका जवाब रेल अधिकारियों के पास भी नहीं है। ज्ञात हो कि केंद्र सरकार ने देश के विभिन्न हिस्सों में 9 सेमी हाईस्पीड कॉरिडोर चिन्हित किया है। इनमें दिल्ली- आगरा, दिल्ली-चंडीगढ़, दिल्ली-कानपुर, नागपुर-बिलासपुर, मैसूर-चेन्नई, मुंबई-गोवा, मुंबई-अहमदाबाद, चेन्नई-हैदराबाद व नागपुर-सिकंदराबाद शामिल है।
इन कॉरिडोर के ट्रैकों की क्षमता 160 से 200 किलोमीटर प्रतिघंटे की है। पहली सेमी हाई स्पीड ट्रेन दिल्ली से आगरा के बीच चलनी है। इसकी क्षमता पहले से ही 150 किमी. प्रतिघंटे है। क्योंकि भोपाल शताब्दी एक्सप्रेस 150 किमी. रफ्तार से ही दौड़ती है।
मात्र 10 किमी. अधिक स्पीड बढ़ाने के लिए काम तेजी से चल रहा है। इस दौरान दिल्ली से आगरा के बीच 5 बार ट्रायल भी हो चुका है। हाई स्पीड ट्रेन की सुरक्षा के लिए विभाग ने ट्रैक के दोनों ओर बाउंड्रीवाल, मथुरा से आगरा के बीच में ऑटोमैटिक सिग्नल लगाने, फरीदाबाद और बल्लभगढ़ में घुमावदार ट्रैक को सीधी करने व बड़खल के पास अप लाइन पर लगे होम सिग्नल को पीछे करने आदि का काम किया जा रहा है।
ट्रायल पर खर्च हो चुके हैं 50 लाख से अधिक:
-रेलवे सूत्रों के मुताबिक ट्रॉयल पर होने वाले खर्च का अनुमान नई दिल्ली से आगरा के बीच शताब्दी एक्सप्रेस के किराए से तुलना कर निकाला जा सकता है। ट्रॉयल वाली ट्रेन में 10 कोच होते हैं। एक कोच में एसी चेयरकार की संख्या 78 होती है। एक सीट का किराया 505 रुपये है। ऐसे में वन साइड में 3,93,900 का नुकसान रेलवे को हुआ। मोटे तौर पर रेलवे ने ट्रॉयल और अफसरों की विजिट पर 50 लाख रुपये से अधिक की धनराशि खर्च कर चुका है।
------------
विभिन्न स्टेशनों पर ट्रैक की स्पीड लिमिट:
ओल्ड स्टेशन-120 किमी. प्रतिघंटा
बल्लभगढ़ स्टेशन-120 किमी. प्रतिघंटा
पलवल स्टेशन- 150 किमी. प्रतिघंटा
कोसी स्टेशन- 90 किमी. प्रतिघंटा
मथुरा स्टेशन- 50 किमी. प्रतिघंटा
आगरा स्टेशन-150 किमी. प्रतिघंटा
भविष्य में इस ट्रैक की स्पीड 200 किलोमीटर प्रति घंटे करने की योजना है। ऐसे में ट्रायल के तौर पर 160 किलोमीटर की क्षमता निर्धारित की गई है। अंत में इसका लाभ जनता को ही मिलना है। यह केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है।
अब जरा देखिए कि इस ट्रेन के ट्रैक पर चलने वाले यात्री कैसे ट्रेन पकड़ते हैं।