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फ्री सफर में परेशान हुए यात्री, अंदर नहीं मिली जगह तो छत पर बैठकर किया सफर

Fri, 19 Aug 2016 09:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद/बल्लभगढ़
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रक्षाबंधन पर यात्री हुए परेशान - फोटो : अमर उजाला
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रक्षा बंधन के पर्व पर बहनों व 15 साल से कम उम्र के बच्चों को फ्री बस यात्रा की सुविधा ने यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी। यात्रा महिलाओं व बच्चों के लिए आफत बन गई। भीड़ के आगे बस सेवा फेल हो गई। बस के लिए न केवल धक्के खाने पड़े बल्कि स्टैंड पर खड़े रहकर लंबा इंतजार भी करना पड़ा। दिनभर परेशानी का यह सिलसिला जारी रहा। बसों में अंदर जगह नहीं मिली तो यात्रियों ने जान जोखिम में डाल छत पर बैठकर सफर करना मुनासिब समझा।
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अपने भाइयों के घर रक्षाबंधन पर्व मनाने जाने वाली बहनों को बसें पकड़ने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। सुबह 5 बजे से ही शहर के बस अड्डों व प्रमुख बस स्टैंड पर महिलाओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। अधिकतर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के बाद ही पानी पीती हैं। घर से भूखे प्यासे सुबह घर से निकली महिलाएं बसों में भीड़ के चलते घंटों देरी से अपने गंतव्य तक पहुंची। कोमल कपूर को अपने बेटे सचिन के साथ रेवाड़ी जाना था।

सुबह 7 बजे बस स्टैंड पर पहुंच गईं, लेकिन जो बस आती उसमें भीड़ के चलते सवार होने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहीं थीं। करीब नौ बजे निजी वाहन का सहारा लेकर रेवाड़ी के लिए रवाना हुईं। नव विवाहिता रीटा को उनके पति राकेश सुबह 8:30 बजे एनआईटी बस स्टैंड छोडने के लिए आए थे। उन्हें करनाल अपने भाई के घर राखी बांधने जाना था। लंबे इंतजार के बाद स्टैंड पर बस आकर लगी। ठसाठस भीड़ के बीच दोनों ने बस में चढने की कोशिश की, लेकिन चालक ने बस चला दी। पति ने संभालने की कोशिश की लेकिन रीटा बस से गिर पड़ी।
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संगीता त्यागी अपनी बेटी रक्षा के साथ मथुरा जाने के लिए बस स्टैंड पर खड़ी थी। वह सुबह आठ बजे से ही बस स्टैंड पर पति और बच्ची के साथ खड़ी बस का इंतजार कर रही थीं। पति उन्हें बस में चढ़ाने आए थे। दो घंटे बाद एक बस बमुश्किल मिली और धक्का-मुक्की के माहौल में बस में चढ़ने की कोशिश की। अचानक संगीता को चक्कर  आ गया और वे चढ़ते हुए वहीं गिर गई। हरियाणा रोडवेज ने अतिरिक्त बसों का संचालन करने का दावा तो किया, लेकिन भीड़ के आगे सारी सुविधाएं नाकाफी दिखीं।

रेलवे स्टेशनों ट्रेनों में रही मारामारी
रक्षाबंधन पर ट्रेनों में भी मारामारी रही। भीड़ के कारण महिलाओं और बच्चों को चढ़ने में भी दिक्कत हुई। बहुतों की ट्रेन भी छूट गई। जीआरपी के जवानों को भी भीड़ नियंत्रित करने में मुश्किल हो रही थी। भीड़ का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शटल गाड़ियों में पैर रखने तक की जगह नहीं थी। टिकट काउंटरों पर लंबी लाइन लगी रही।

वैसे तो सुबह 5 बजे से ही स्टेशनों पर महिलाओं की भीड़ बढनी शुरू हो गई थी। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया स्टेशनों और ट्रेनों में भीड़ बढ़ती गई। हालांकि सुबह के वक्त हुई हल्की बारिश के कारण थोड़ी असुविधा हुई लेकिन 10 बजे के बाद अचानक भीड़ बढ़ने लगी। देर शाम तक ये सिलसिला जारी रहा। नई दिल्ली से पलवल और पलवल से नई दिल्ली की ओर जाने वाली शटल गाड़ियों में पैर रखने तक की जगह नहीं थी। कई महिलाएं भीड़ के कारण ट्रेनों में नहीं चढ़ पा रही थी। प्लेटफार्म पर गश्त कर रहे जीआरपीकर्मी उन्हें बड़ी मुश्किल से महिला कोच में चढ़ाते नजर आए।

फुल होकर चली मेट्रो
आमतौर पर दिन के लिए यात्रियों के लिए तरसने वाली मेट्रो बृहस्पतिवार को दिनभर ठसाठस भरी दिखी। मेट्रो की फ्रिक्वेंशी कम होने के चलते यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ी। कई मेट्रों में आईटीओ से एस्कॉर्ट्स मुजेसर का अनाउंसमेंट किया गया, लेकिन बदरपुर बॉर्डर पर ही ट्रेन को खाली करा लिया गया। इसके बाद यात्रियों को दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाकर फरीदाबाद की ओर जाने वाली दूसरी ट्रेन का इंतजार करना पड़ा। सुबह के समय भीड़भाड़ बेहद ज्यादा थी, देर शाम तक यही सिलसिला चलता रहा।
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