सुप्रीम कोर्ट के सख्त एतराज के बाद अब दिल्ली सरकार की महिलाओं को मेट्रो में मुफ्त सफर कराने की योजना पर ब्रेक लग सकता है। अदालत के रुख से साफ है कि इस योजना के बचाव में दिल्ली सरकार को काफी मशक्कत करनी पड़ेगी।
हालांकि, दिल्ली सरकार अभी इस मसले में कुछ भी कहने से बच रही है। सरकार कोर्ट के टिप्पणियों का अध्ययन कर प्रस्ताव पर आगे काम करेगी। दिल्ली सरकार की मेट्रो में मुफ्त सफर कराने की योजना शुरुआत से ही विवादों में रही है।
योजना घोषित होने के बाद से केंद्र सरकार ने डीएमआरसी की वित्तीय स्थिति खराब होने का हवाला देते हुए एतराज जताया था। वहीं, मेट्रो मैन ई. श्रीधरन ने इस बारे में प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखकर योजना रोक देने की राय दी थी।
उनकी सलाह थी कि अगर दिल्ली सरकार महिलाओं को मुफ्त यात्रा कराना चाहती है तो सीधे लाभार्थियों का रकम सौंप दी जाए। डीएमआरसी के मौजूदा सिस्टम से इसके नाम पर किसी तरह की छेड़छाड़ न की जाए।
उधर, डीएमआरसी ने दिल्ली सरकार की योजना लागू करने के लिए आठ महीने का वक्त मांगा था। अगर योजना पर अदालत का नजरिया सकारात्मक रहता तो सरकार को नैतिक ताकत मिलती। इसके दम पर वह डीएमआरसी से तत्काल योजना लागू करने की बात करती। वहीं, केंद्र सरकार को भी मसले में समझाने की कोशिश करती। लेकिन अदालत के सवाल उठाए जाने से योजना अधर में लटकती दिख रही है।