इन दिनों मेवात में फर्जी सनद का मामला गर्माया हुआ है। शासन प्रशासन के सम्मुख की जाने वाली शिकायतों में महिला सरपंचों पर फर्जी सनद के सहारे चुनाव जीतने का सबसे अधिक आरोप सामने आ रहे है। प्रशासन भी निरंतर बढ़ रही शिकायतों को लेकर गंभीर नजर आ रहा है।
मेवात में शिक्षा का स्तर बेहद कम है। यह क्षेत्र मेव बाहुल्य है, यहां लड़कियों की तालिम को लेकर खास रूचि नहीं है। इसका जीताजागता ताजा उदाहरण पंचायत के आम चुनाव में साफ देखने को मिला है।
जिन महिलाओं ने सरपंची का चुनाव जीता है, उनमे से चंद महिलाओं को छोड़ अधिकतर महिलाओं की शैक्षिणक योगयता पर सवाल खड़े किए गए है।
जिन महिलाओं के विरूद्व प्रशासन से फर्जी सनद की शिकायत ग्रामीणों की और दर्ज कराई गई है। उनमे उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान से जारी हुई सनदों पर सवाल खड़े किए गए है।
इन प्रदेशों से जारी सनदों को क्षेत्र के लोग संदेह से देख रहे है। यहां यह बड़ा सवाल है, जब मेवात के लोग अपनी बेटियों को गांवों के स्कूलों में शिक्षा दिलाने में सकोंच करते है, तो सरपंची का चुनाव जीतने वाली महिलाएं अन्य प्रदेशों में बाहर जाकर कैसे शिक्षा ग्रहण कर सकती है।
क्षेत्र के जागरूक लोगों का कहना है की इस मामले की गहना से जांच होनी चाहिए। ताकि ऐसा करने वाले लोगों पर शिकंजा कस सके। सरकार के नये शैक्षिणक आदेश के लागू होने के बाद से मेवात में बेटियों की शिक्षा को बढावा मिलेगा।