फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आईटीसी क्लेम में कई सौ करोड़ का खेल, दावों के सत्यापन में जांच एजेंसियों के छूटे पसीने

Sun, 11 Nov 2018 12:27 PM IST
अरुण चट्ठा, अमर उजाला, गाजियाबाद
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
विज्ञापन
जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) की आड़ में फर्जी तरीके से आईटीसी क्लेम कर सरकार को मोटा चूना लगाया जा रहा है। अब तक केंद्रीय व राज्य की जांच एजेंसियां एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स चोरी के मामले पकड़ चुकी है। यह नोएडा, गाजियाबाद व मेरठ से जुड़े हैं। 580 करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स चोरी डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीआई) ने पकड़ी है।
विज्ञापन


शेष वाणिज्य कर विभाग ने पकड़ी, लेकिन यह खेल उससे भी बड़ा है। कारण जीएसटी लागू होने के बाद फर्जी तरीके से फर्म बनाई गई हैं, जिनके नाम पर गोरखधंधा चल रहा है। मौजूदा वक्त में दिल्ली व एनसीआर में पांच हजार से अधिक ऐसी फर्म संचालित हैं, जिनके आईटीसी क्लेम को लेकर जांच चल रही है।

पहले चरण में जांच के लिए उन फर्मों को चिन्हित किया गया है, जिन्होंने एकाएक मोटा आईटीसी क्लेम किया है। इसमें आईटी, ऑटो स्पेयर पार्ट, ऑटो मोबाइल, लोहा व अन्य उत्पाद सप्लाई व तैयार करने वाली फर्म शामिल हैं। डीजीजीआई उन सभी फर्मों की कुंडली खंगाला रही है, जिन्होंने जीएसटी लागू होने के बाद पांच करोड़ रुपये से अधिक का आईटीसी क्लेम किया है। इनमें भी उन फर्मों को पहले स्थान पर रखा गया है जो जीएसटी लागू होने के बाद बनाई गईं। इसके पीछे सबसे अहम कारण पांच करोड़ से अधिक की टैक्स चोरी पकड़े जाने पर संबंधित व्यक्ति को गिरफ्तार किए जाने का अधिकार है।  
विज्ञापन


ऐसे में डीजीजीआई का मानना है कि जीएसटी की आड़ में हो रही टैक्स चोरी को रोकने के लिए फर्जी फर्म संचालित करने वाले लोगों को तेजी से जेल भेजा जाना जरूरी है। सूत्र बताते हैं कि दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ व सहारनपुर की पांच हजार फर्मों में डेढ़ सौ से अधिक ऐसी फर्म हैं, जिन्होंने 20 करोड़ रुपये से अधिक का आईटीसी क्लेम ले लिया है। इनमें से कुछ फर्मों के पंजीकृत पतों को सत्यापन किया गया तो वो सब फर्जी निकली हैं।

इनमें से कई फर्मों के बैंक खाते भी आईटीसी क्लेम लेने के बाद एकाएक बंद हो गए हैं। फर्म के निदेशक व अन्य लोगों के मोबाइल नंबर बंद हैं या फिर जल्दी-जल्दी लोकेशन बदल रहे हैं। कारण बीते महीने दिल्ली से 300 करोड़ की टैक्स चोरी में तीन लोगों की गिरफ्तारी के बाद एकाएक फर्मों के बैंक खाते बंद किए जा रहे हैं या फिर उनमें जमा धनराशि निकाली जा रही है। ऐसे मे माना जा रहा है कि आईटीसी क्लेम के खेल में बड़ा गिरोह संचालित है, जो कार्रवाई के  बाद बैंकों से अपना पैसा निकाल रहा है।
विज्ञापन

सूत्र बताते हैं कि मेरठ की एक फर्म ने 10 करोड़ से ऊपर का आईटीसी क्लेम हासिल किया, लेकिन जिस पते पर फर्म पंजीकृत थी, वहां उस नाम की कोई फर्म संचालित नहीं है। बैंक खातों से अभी अधिकांश धनराशि निकाल ली गई है। यह कंपनी विद्युत के सामन सप्लाई करने के लिए खोली गई थी। 

गिरोह सक्रिय, बारीकी में माहिर
जीएसटी की आड़ में दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद व मेरठ में ऐसा गिरोह सक्रिय हो गया जो टैक्स क्लेम से जुड़ी बारीकियों में महारत रखता है। उसी गिरोह ने फर्जी पते व पैन कार्ड नंबर के आधार पर फर्म बनाईं। फिर इन्हीं फर्म के नाम पर फर्जी बिल काट कर खरीद-बिक्री दिखाई। इसके बाद इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) क्लेम कर रिटर्न ले लिया।

हैरत की बात यह है कि इन फर्मों ने कोई सामान खरीदा ही नहीं और न ही बेचा। यानी सरकार को कोई धनराशि अदा ही नहीं की, उल्टे सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये आईटीसी क्लेम के नाम पर हड़प लिया। अक्तूबर तक डीजीजीआई ने पश्चिमी यूपी व दिल्ली में 70 मामले पकड़े, जिनमें 580 करोड़ की टैक्स चोरी की गई थी। इनमें से 115 करोड़ रुपये विभाग की तरफ से रिकवर भी किए जा चुके हैं। उधर, पश्चिमी यूपी में वाणिज्य कर विभाग ने भी 500 करोड़ रुपये से अधिक की फर्जी आईटीसी क्लेम के मामले पकड़े हैं। हालांकि रिकवरी में वाणिज्य कर विभाग डीजीजीआई से काफी पीछे रहा है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें