बिहार से बीएससी (भौतिकी शास्त्र) में ग्रेजुएशन डिग्री होल्डर कुणाल पीएंडएमजी कंपनी का निदेशक था। ये कंपनी ऑनलाइन स्कॉलरशिप का व्यवसाय करती है। ये ठगी करने वाले गिरोह का मुख्य साजिशकर्ता है। जगदीश राय 1982 में बतौर एमटीएस भर्ती हुआ था और फिलहाल ग्रामीण विकास मंत्रालय में तैनात था। ये फर्जी साक्षात्कार के लिए कृषि भवन में जगह उपलब्ध कराता था।
संदीप कुमार 2007 में गृह मंत्रालय में एमटीएस स्टाफ के तौर पर भर्ती हुआ था। अभी ग्रामीण विकास मंत्रालय में तैनात था। ये आरोपियों व पीड़ितों को कृषि मंत्रालय में प्रवेश करवाता था। वसीम ने वेब डिजाइनिंग में मेरठ से डिप्लोमा किया हुआ है।
ये पीआरडी प्रा. लि., मेरठ नाम की कंपनी में डिजाइनर की नौकरी कर रहा था। ये फर्जी साक्षात्कार लेटर तैयार करता था। अंकित साक्षात्कार लेता था। बीटेक (आईटी) डिग्री होल्डर विशाल गोयल नोएडा की एक कंपनी में सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर की नौकरी करता था। ये ओएनजीसी के नाम पर फर्जी ई-मेल आईडी बनाता था। सुमन प्राइवेट कंपनी में मार्केटिंग हेड के रूप में काम करता था। ये पीड़ितों के साक्षात्कार लेता था।