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ओएनजीसी में सहायक इंजीनियर लगाने के नाम पर ठगी, 7 आरोपियों में दो ग्रामीण विकास मंत्रालय के कर्मचारी

Wed, 19 Sep 2018 09:03 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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गिरफ्तार आरोपी - फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश कर सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दो आरोपी ग्रामीण विकास मंत्रालय के कर्मचारी हैं। इनके कब्जे से 27 मोबाइल, दो लैपटॉप, दस चेकबुक, फर्जी वोटर आईडी और 45 सिम कार्ड बरामद किए गए हैं।

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अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त राजीव रंजन के अनुसार, ओएनजीसी ने वसंत कुंज (नॉर्थ) थाने में शिकायत दी थी कि ओएनजीसी में सहायक इंजीनियर की नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से ठगी हो रही है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच अपराध शाखा को सौंप दी थी।

टीम को जांच में पता लगा कि बेरोजगार युवाओं के पास ओएनजीसी की ओर से अधिकारिक मेल गया है और कृषि भवन में साक्षात्कार हुए हैं। ओएनजीसी में पीड़ितों से रणधीर सिंह उर्फ कुणाल किशोर ने 22 लाख रुपये लिए हैं। इसके बाद रणधीर गायब हो गया। रैकेट का पर्दाफाश करने के लिए विशेष टीम तैयार की गई।
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पुलिस को जांच में पता लगा कि आरोपियों ने पीड़ितों के नाम पर होटल में कमरे बुक कराए थे। आखिरकार पुलिस ने कुणाल किशोर उर्फ रणधीर को पकड़ लिया। इसके बाद सरोजनी नगर (दिल्ली) निवासी जगदीश राज, नजफगढ़ (दिल्ली) निवासी संदीप कुमार, लिसरी रोड (मेरठ) निवासी वसीम, सनड्रम कॉलोनी बागपत रोड (मेरठ) निवासी अंकित गुप्ता, सिवाल खास (मेरठ) निवासी विशाल गोयल और लक्ष्मी नगर (दिल्ली) निवासी सुमन सौरभ को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ओएनजीसी में नौकरी दिलाने के नाम पर 23 युवाओं से, रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर 40 युवाओं से और एफसीआई में नौकरी दिलाने के नाम पर दर्जनों युवाओं से ठगी कर चुके हैं।

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कंपनी का निदेशक था मुख्य साजिशकर्ता

बिहार से बीएससी (भौतिकी शास्त्र) में ग्रेजुएशन डिग्री होल्डर कुणाल पीएंडएमजी कंपनी का निदेशक था। ये कंपनी ऑनलाइन स्कॉलरशिप का व्यवसाय करती है। ये ठगी करने वाले गिरोह का मुख्य साजिशकर्ता है। जगदीश राय 1982 में बतौर एमटीएस भर्ती हुआ था और फिलहाल ग्रामीण विकास मंत्रालय में तैनात था। ये फर्जी साक्षात्कार के लिए कृषि भवन में जगह उपलब्ध कराता था।

संदीप कुमार 2007 में गृह मंत्रालय में एमटीएस स्टाफ के तौर पर भर्ती हुआ था। अभी ग्रामीण विकास मंत्रालय में तैनात था। ये आरोपियों व पीड़ितों को कृषि मंत्रालय में प्रवेश करवाता था। वसीम ने वेब डिजाइनिंग में मेरठ से डिप्लोमा किया हुआ है।

ये पीआरडी प्रा. लि., मेरठ नाम की कंपनी में डिजाइनर की नौकरी कर रहा था। ये फर्जी साक्षात्कार लेटर तैयार करता था। अंकित साक्षात्कार लेता था। बीटेक (आईटी) डिग्री होल्डर विशाल गोयल नोएडा की एक कंपनी में सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर की नौकरी करता था। ये ओएनजीसी के नाम पर फर्जी ई-मेल आईडी बनाता था। सुमन प्राइवेट कंपनी में मार्केटिंग हेड के रूप में काम करता था। ये पीड़ितों के साक्षात्कार लेता था।
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