सॉफ्टवेयर इंजीनियर के नाम पर दो जगह से 22 लाख रुपये का फर्जी लोन ले लिया गया। पीड़ित को तीन माह बाद घर पर रिकवरी टीम पहुंचने से फर्जीवाड़े का पता चला। पीड़ित ने संबंधित बैंक और फाइनेंस कंपनी से लोन के लिए दिए गए दस्तावेज दिखाने को कहा तो दोनों ने दस्तावेज दिखाने से मना कर दिया। बैंक और आरबीआई को शिकायत कर थक चुका पीड़ित अब पुलिस के चक्कर काट रहा है। मामले में मंगलवार को पीड़ित ने एसपी सिटी अरुण कुमार सिंह से शिकायत की है।
सेक्टर-82 निवासी आनंद कुमार शुक्ला सेक्टर-104 स्थित एक आईटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। आनंद ने बताया कि उन्होंने कुछ समय पहले बैंक खाते में ईमेल आईडी और पता अपडेट किया था। इसके बाद जुलाई में उनके पास स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक और बजाज फिंनसर्व कंपनी की रिकवरी टीम पहुंच गई, तब उन्हें पता चला कि दोनों जगह से उनके नाम पर मार्च 2017 में 11.77 लाख रुपये और 10.38 लाख रुपये का फर्जी लोन लिया गया है।
उन्होंने कभी लोन के लिए आवेदन नहीं किया। बावजूद दोनों जगहों से उन्हें लोन की किश्तें भरने का दबाव डाला जा रहा है। किश्त न भरने पर दोनों जगह से उसका वित्तीय लेनदेन संबंधी सिविल स्कोर खराब करने की धमकी दी जा रही है। दोनों जगहों से उन्होंने कई बार लोन के लिए प्रयुक्त किए गए दस्तावेज और हस्ताक्षर आदि मिलान के लिए अनुरोध किया, लेकिन उन्हें कोई जानकारी नहीं दी जा रही है।
दोनों जगहों से उन्हें जवाब दिया गया कि वह केवल पुलिस को ही संबंधित जानकारी देंगे वह भी एफआईआर के आधार पर। फर्जी लोन कराने के लिए किसी ने उनके फर्जी ई-मेल आईडी और फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस का इस्तेमाल किया है। पैन कार्ड की फोटो कापी वास्तविक प्रयोग की गई है।
तीन माह तक आरोपी ने भरी किश्त
आनंद ने बताया कि तीन माह तक आरोपी ने फर्जी लोन की किश्तें भरीं। इसके बाद उसने किश्त जमा करनी बंद कर दी, तब उसके पास रिकवरी टीम पहुंची। दोनों जगह से आरोपी ने नोटबंदी के दौरान लोन लिया था। इसके लिए उसके फर्जी दस्तावेज के आधार पर उसके नाम से एक मोबाइल नंबर लिया गया और लोन की राशि प्राप्त करने के लिए उसके नाम से फर्जी बैंक खाता भी खोला गया।