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गाड़ी में मिले लंगूर, सामने आया घिनौना धंधा

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वन विभाग और दिल्ली क्राइम ब्रांच के अधिकारी तब सकते में जब शुक्रवार को उन्हें दिल्ली के धौला कुआं इलाके से एक एसयूवी गाडी में चार लंगूर मिले। तस्कर लंगूरो को फरीदाबाद से पकड़ कर हरियाणा और पंजाब में बेचने जा रहे थे। सभी पांच अभियुक्त पुलिस की गिरफत में हैं।
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इन लंगूरों का इस्तेमाल ओखला में बनी कुछ फैक्ट्रियों और लग्जरी कारों के गोदाम के आस-पास जमा होने वाले बंदरों को भगाने के लिए किया जाता है। सभी पशुओं को मेडिकल जांच के लिए भेज दिया गया है।

डीसीपी भीष्म सिंह की अध्यक्षता में तस्करी के इस व्यापार मे शामिल अन्य लोगों को खोजने के लिए एक टीम का गठन भी किया गया है। अभियुक्तों की पहचान शाहिद खान, बारिश, सुनील कुमार, शाहिद अली व गोलू के रूप में की गई है।
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जानवरों के ‌खिलाफ हो रहा जानवरों का इस्तेमाल

पुलिस के अनुसार गैंग का सरगना शाहिद पहले सर्कस में काम करता था। अभियुक्त ने बताया कि वो फरीदाबाद के जंगलो से लंगूर के बच्चों को पकड़ता था। असल में हरियाणा में बनी कई फैक्ट्रियों में बंदरों का आतंक है।

इन बंदरों को भगाने के लिए लंगूरों की मांग है जिसकी पूर्ति करके ये तस्कर कमाई करते हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वन विभाग ने उन्हें पहले ही इन पशु तस्करों की गतिविधियों के बारे में आगाह किया था। इसके बाद से वाहनों की जांच शुरू कर दी गई थी।

तलाशी के दौरान ही एसयूवी गाडी में सवार चार लोगों को लंगूरों के साथ पकड़ गया। हालांकि इस दौरान इन तस्करों ने भागने की कोशिश भी की । पुलिस ने पीछा कर उन्हें दबोच लिया। बरामद किए गए सभी पशुओं की उम्र 2 वर्ष से कम है।
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अमानवीय परिस्थिती में रखे जाते हैं मासूम जानवर

पकड़े गए तस्करों ने बताया कि वे पंजाब के फगवाड़ा में एक कपडा मिल में इन पशुओं को बेचने जा रहा थे। उन्होंने कहा कि वे हरियाणा की कुछ ऑटोमोबाइल कंपनियों को भी पशुओं को किराये पर देते हैं।

सूत्रों के अनुसार एक पशु की कीमत तकरीबन दस से पंद्रह हजार रूपये तक लगाई जाती है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इन पशुओं को अमानवीय स्थिती में रखा जाता है जिससे कई बार वे मर भी जाते हैं।

जबकि पुलिस का कहना है कि लंगूरो को व्यवसाय के लिए इस्तेमाल करना कानूनी अपराध है। सभी के खिलाफ वन्यजीव अधिनियम कानून की धाराओं के अंर्तगत केस दर्ज किया गया है।
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