एम्स के नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. रोहित का कहना है कि भारत में दृष्टिहीनता के मामलों में लगातार कमी देखने को मिल रही है लेकिन शहरी क्षेत्रों में युवाओं में रोशनी कम की परेशानी भी एक चुनौती है। इसके पीछे खानपान से लेकर उनकी जीवनशैली या आनुवांशिकता जैसे कई कारण हो सकते हैं।
वहीं नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. राहिल चौधरी का कहना है कि जीवनशैली के साथ साथ लोगों में जागरुकता का अभाव इसे बढ़ावा दे रहा है। बहुत से लोग एक बार नेत्रजांच कराने के बाद कई वर्ष तक उसका ध्यान ही नहीं रखते हैं।
स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्र कम रोशनी में पढ़ाई सहित अपने रोजमर्रा के काम करते हैं जिससे उनकी आंखों पर जोर पड़ता है। इसलिए डॉक्टर समय समय पर स्क्रीनिंग की सलाह देते हैं।
डॉक्टरों के अनुसार दिल्ली में प्रवासी मजदूरों की संख्या काफी ज्यादा है। आर्थिक रुप से कमजोर होने के कारण इनका खानपान बेहद कमजोर होता है और ये स्वास्थ्य जांच सेवाओं तक भी नहीं पहुंच पाते हैं। इनका कहना है कि उपचार और जांच उपलब्ध होने के बाद भी इसका लाभ नहीं ले पा रहे हैं।
अभिभावकों को बच्चों की संतुलित जीवनशैली और मोबाइल, टीवी इत्यादि को उनसे दूरी पर रखने, कम रोशनी में पढ़ाई नहीं करने, समय समय पर नेत्रजांच इत्यादि की सलाह है।