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दिल्लीः शेल्टर होम की संचालिका समेत 4 गिरफ्तार, लड़कियों को दी जाती थी यातनाएं

Sun, 30 Dec 2018 03:32 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
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द्वारका सेक्टर-23 स्थित निजी शेल्टर होम (आश्रय गृह) में रहने वाली मासूम बच्चियों को यातना देने के मामले में पुलिस ने शेल्टर होम की संचालिका समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। शुक्रवार रात पकड़े गए लोगों में वेलफेयर ऑफिसर और दो हाउस मदर भी शामिल हैं। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर जांच में जुट गई है। उधर शेल्टर होम के बाहर पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया है ताकि वहां रहने वाली लड़कियों को किसी तरह की कोई दिक्कत न हो।

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जानकारी के मुताबिक दिल्ली सरकार की सलाह पर दिल्ली महिला आयोग ने राजधानी में चल रहे शेल्टर होम की जांच के लिए एक समिति बनाई है। समिति के सदस्यों ने बृहस्पतिवार को द्वारका स्थित निजी शेल्टर होम का दौरा किया था। उस दौरान वहां रहने वाली लड़कियों ने दी जाने वाली यातनाओं के बारे में बताया था। लड़कियों ने बताया था कि काम नहीं करने पर उनके साथ मारपीट की जाती थी और गलती करने पर मिर्च का पाउडर डालकर यातनाएं दी जाती थीं। लड़कियों के इस तरह के खुलासे के बाद समिति के सदस्यों ने निजी शेल्टर होम के खिलाफ थाने में शिकायत दी। शिकायत पर पुलिस ने लड़कियों का अदालत में बयान दर्ज कराने के बाद शुक्रवार को पोक्सो एक्ट और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया था।  

चिल्लाने की आवाज सुनकर दहल जाते थे पड़ोसी
निजी शेल्टर होम के पड़ोस में रहने वाले लोग लड़कियों को दी जाने वाली यातनाओं से पहले से ही इससे वाकिफ थे। पड़ोसियों के मुताबिक दो माह पहले ही शेल्टर होम नई बिल्डिंग में शिफ्ट हुआ है। यहां अक्सर उन्हें लड़कियों की चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनाई देती थी। लड़कियों की आवाज सुनकर स्थानीय लोग शेल्टर होम में जाते थे और संचालिका को उन्हें ठीक से रखने की सलाह देकर बाहर आ जाते थे। इससे पूर्व शेल्टर होम कॉलोनी के बाहरी हिस्से में था, इसलिए लोगों को वहां चल रही गतिविधियों के बारे में ज्यादा पता नहीं था।
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स्कूल के साथियों से किया था यातना का जिक्र 
शेल्टर में रहने वाली लड़कियां स्कूल में अपने सहपाठियों और सहेलियों से भी यातनाओं का जिक्र करती थीं। लड़कियों के साथियों के मुताबिक उनके शरीर पर कई बार जख्म के निशान देखने को मिलते थे। लड़कियां उन्हें बताती थी कि गलती करने पर खाना नहीं दिया जाता। साथ ही उनकी डंडे से पिटाई की जाती है। सहेलियां अपने घरों से उनके लिए उनके लिए खाना लाती थीं। इन लड़कियों में संचालिका का खौफ इतना था कि वह स्कूल में भी खाना डर-डर के खाती थीं। 

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