फर्जी कंपनियों के नाम पर करंट अकाउंट खोलकर ठगी करने वाले गिरोह के चार लोगों को मध्य जिले की साइबर थाना पुलिस ने दबोचा है। इनमें एक निजी बैंक के दो कर्मचारी भी शामिल हैं। बैंक कर्मियों की मिलीभगत से खाते खुलवाकर आरोपी साइबर ठगों को बेच देते थे। इन खातों को ठगी की रकम लेने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
साइबर ठग फर्जी ट्रेडिंग एप के जरिये पीड़ितों को निवेश करने पर अच्छा मुनाफा देने का झांसा देते थे। ठगी की रकम को पहले इन खातों में डाला जाता था। बाद में पुलिस से बचने के लिए रकम को कई खातों में घुमाने के बाद विदेश भेज दिया जाता था।
पकड़े गए आरोपियों की पहचान हापुड़ की गढ़ रोड के पक्का बाग निवासी अमन कुमार, हापुड़ के आर्या नगर निवासी राहुल त्यागी और बैंक कर्मचारी गौतमबुद्ध नगर के दुजाना निवासी अंकित कुमार व बरेली के मानपुर के टांडा मीरनगर निवासी अभिषेक सिंह के रूप में हुई है।
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर 11 चेकबुक, तीन पैन कार्ड, चार मोबाइल फोन व भारी मात्रा में अन्य सामान बरामद किया है। पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर मामले की छानबीन की जा रही है। अमन व राहुल ने साइबर ठगों को खाते बेच दिए थे। मध्य जिला पुलिस उपायुक्त एम हर्षवर्धन के अनुसार, पुलिस पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है।
विज्ञापन देखकर किया था 16.70 लाख का निवेश : पटेल नगर के रहने वाले एक शख्स ने फेसबुक पर निवेश का विज्ञापन देखा। विज्ञापन में निवेश करने पर मोटा मुनाफा देने की बात की गई थी। उस पर क्लिक करते ही आरोपियों ने उसे एक व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़ दिया। वहां शुरुआत में 10 हजार रुपये निवेश करने पर उसके खाते में अच्छी रकम दिखने लगी। इसके बाद आरोपियों ने उसे और निवेश करने के लिए कहा। पीड़ित ने 16.70 लाख निवेश कर दिए। इसके बाद उसको दोगुना मुनाफा दिखने लगा। उसने खाते से रुपये निकालने का प्रयास किया तो ग्रुप से निकाल दिया गया। ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने मध्य जिला साइबर थाना पुलिस से शिकायत की।
ऐसे पकड़े गए ठगी के आरोपी
पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू की। उन खातों की पड़ताल की गई, जिनमें ठगी की रकम गई थी। उसी कड़ी में पता चला कि एक खाते में पांच लाख रुपये ट्रांसफर हुए थे। खाता नोएडा के एक निजी बैंक में धर्म इंटरप्राइजेज के नाम से खुला था। छानबीन की गई तो पुलिस ने 9 अप्रैल को सबसे पहले अमन को हापुड़ से दबोच लिया। उससे पूछताछ के बाद दूसरे आरोपी राहुल त्यागी को नोएडा के सेक्टर-7 से 10 अप्रैल को गिरफ्तार किया। उसके घर की तलाशी लेने पर 11 चेकबुक, तीन पैन कार्ड व अन्य सामान बरामद हुआ। सभी खाते फर्जी दस्तावेज के आधार पर खुलवाए गए थे। राहुल व अमन खाते खोलकर साइबर ठगों के हवाले कर देते थे। बदले में इनको ठगी की रकम का कमीशन मिलता था।
बैंक कर्मचारी खाते खोलने में मदद करते थे
अमन व राहुल फर्जी निजी कंपनियों के नाम से एक निजी बैंक में खाते खुलवा रहे थे। बैंक कर्मचारी अंकित व अभिषेक दोनों खाते खोलने में इनकी मदद करते थे। दोनों फर्जी दस्तावेज और वेरिफिकेशन को नजरअंदाज कर दिया करते थे। ऐसे में दोनों आरोपियों ने कई खाते खुलवाकर साइबर ठगों को सौंप दिए। पुलिस ने राहुल व अमन के खुलासे के बाद अंकित और अभिषेक को भी गिरफ्तार कर लिया।