दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले दो तस्करों के गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इन दो गिरोह के चार तस्करों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से बढि़या क्वालिटी की 2.7 किलो हेरोइन व 100.338 किलोग्राम अफीम बरामद की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बरामद मादक पदार्थो की कीमत करीब 40 करोड़ रुपये बताई जा रही है। आरोपी म्यांमार से मणिपुर के रास्ते मादक पदार्थ लाकर दिल्ली, एनसीआर, पंजाब और राजस्थान में सप्लाई करते थे।
स्पेशल सेल के पुलिस अधिकारियों के अनुसार, टीम ने गाजीपुर इलाके से मादक पदार्थ तस्कर मणिपुर निवासी मो. इरफान को 25 मार्च को गिरफ्तार किया। आरोपी ने स्कॉर्पियो गाड़ी की खिड़की व स्टेपनी में हेरोइन छिपाने के लिए विशेष जगह बना रखी थी। गाड़ी से 2.7 किलोग्राम हेरोइन बरामद की गई। आरोपी ने बताया कि वह मादक पदार्थों को पहुंचाने के लिए कैरियर का काम करता था। उसे एक ट्रिप का 20 हजार रुपये मिलता था। वह ट्रक की बॉडी बनाने के काम करता था। इस दौरान रोशन नाम के व्यक्ति के जरिए एक महिला किपजेन के संपर्क में आया। किपजेन के कहने पर वह असम से दिल्ली मादक पदार्थों की सप्लाई करने लगा। किपजेन ने ही उसे स्कॉर्पियो कार दी थी। वह मादक पदार्थों की दो से तीन खेप पहले भी ला चुका है।
पुलिस उपायुक्त आलोक कुमार ने बताया कि सेल में तैनात इंस्पेक्टर रंजीत सिंह की टीम ने तीन मादक पदार्थ तस्कर राजस्थान निवासी ओनकार माल, ओमप्रकाश उर्फ फौजी और विकास प्रतीक को सरिता विहार इलाके से गिरफ्तार किया। इनके कैंटर से 100.338 किलोग्राम अफीम बरामद की गई। इन्होंने अफीम को छिपाने के लिए कैंटर में विशेष जगह बना रखी थी। ये भी मणिपुर से अफीम लाते थे।
अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स गिरोह के हैं सदस्य
तीनों आरोपियों ने खुलासा किया कि वह अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स गिरोह के सदस्य हैं। ये मणिपुर के रास्ते म्यांमार से अफीम लाकर दिल्ली-एनसीआर व राजस्थान में सप्लाई कर रहे थे। ओमप्रकाश गिरोह का सरगना है। वह वर्ष 2001 में बीएसएफ में बतौर सिपाही भर्ती हुआ था। वर्ष 2011 में जब ये सिलचेर, असम में तैनात था, तभी से ही मादक पदार्थों की तस्करी करने लग गया। वर्ष 2017 में ये साथी के साथ जोधपुर, राजस्थान में फर्जी कॉल सेंटर चलाने के आरोप में गिरफ्तार हुआ था। वर्ष 2020 में दोहरे हत्याकांड में भी गिरफ्तार हुआ था।