'45 करोड़ का शीश महल बनवाया'
उन्होंने अपने लिए 45 करोड़ का शीश महल बनवाया और लक्जरी कारों में यात्रा करना शुरू कर दिया। उन्होंने आप द्वारा गठित विशेषज्ञ समितियों की 33 विस्तृत नीति रिपोर्टों को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि समय आने पर पार्टी समीचीन नीतियां अपनाएगी। उन्हें लगा कि राजनीति झांसे और प्रचार से की जा सकती है। यह आम आदमी पार्टी के अंत की शुरुआत है।'
मुस्लिमों का समर्थन ही पर्याप्त नहीं
दिल्ली चुनाव में भाजपा ने हिंदुत्व पर अधिक जोर नहीं दिया, तो मुसलमानों को आकर्षित करने की भी कोशिश नहीं की। नतीजों से लगता है कि मुस्लिमों ने आप के नरम हिंदुत्व को नजरअंदाज किया और भाजपा को भी वोट दिया। लेकिन आप या किसी भी पार्टी के लिए दिल्ली में चुनाव जीतने के लिए सिर्फ मुसलमानों का समर्थन ही पर्याप्त नहीं है।
आप का सत्ता विरोधी लहर को नजरअंदाज करना पड़ा भारी
सत्ता विरोधी लहर के कारण 2024 चुनावों के लिए सुपर ईयर था। मतदाताओं के असंतोष के कारण ब्रिटेन से अमेरिका तक कई देशों में सत्तारूढ़ दलों का पतन हुआ है। लगातार दस साल में सत्ता पर काबिज आप इसे समझ नहीं सकी। उसे यमुना की सफाई, यूरोपियन स्टैंडर्ड की सड़कें और 24 घंटे साफ पानी जैसे वादे पूरे न करना भारी पड़ा। मतदान के ऐन मौके पर जहरीली यमुना का दांव भी उल्टा पड़ गया।
संघ का समर्थन भाजपा का असली पावरबैंक, 5,000 से अधिक बैठकें
आम चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद संघ-भाजपा के बीच समन्वय की कमी की बातें सामने आईं। लेकिन संघ ने हरियाणा व महाराष्ट्र में भाजपा का पूरा साथ देकर साबित कर दिया कि संघ असली पावरबैंक है। संघ कार्यकर्ताओं ने 5,000 से अधिक नुक्कड़ और ड्राइंग रूम बैठकें कीं। संघ पार्टी को अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अपने वादों को अनुकूलित करने वाले हाइपरलोकल अभियान लाने में मदद करता है।
मुफ्त रेवड़ियां जरूरी, पर जीत के लिए काफी नहीं
नतीजों ने साबित कर दिया-मुफ्त रेवड़ियां चुनाव जीतने के लिए जरूरी हो सकती हैं, लेकिन पर्याप्त नहीं। महाराष्ट्र, झारखंड और दिल्ली, तीनों चुनावों में राज्य सरकारों के कल्याणकारी कार्यक्रमों पर बहुत अधिक ध्यान दिया गया। इन मुफ्त रेवड़ियों ने महाराष्ट्र और झारखंड सरकारों को सत्ता वापसी मदद की, लेकिन दिल्ली में यह विफल रहा। इससे पहले, बीआरएस और वाईएसआरसीपी भी मुफ्त रेवड़ियों पर दांव लगाने के बावजूद हार गई थी।