केंद्र में सरकार किसी भी पार्टी की हो, दिल्ली सरकार को उससे व उसके द्वारा नियुक्त उपराज्यपाल से मिलकर ही काम करना होगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो दिल्ली का विकास संभव नहीं। दिल्ली देश की राजधानी है और पूरे विश्व की निगाह उस पर रहती है।
ऐसे में दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलना संभव नहीं है। वर्तमान में दिल्ली सरकार द्वारा दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा प्रदान करने के प्रस्ताव पर दिल्ली में 15 वर्ष तक मुख्यमंत्री रही शीला दीक्षित ने
अमर उजाला प्रतिनिधि विजय सिंघल से विशेष बातचीत में खुलकर अपने विचार प्रकट किए।
इतना ही नहीं, उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जब उसने चुनाव में दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की बात की है तो उसे वादा पूरा करना चाहिए।
शीला दीक्षित
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क्या दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलना चाहिए?
शीला: यह एक ऐसा सवाल है जिसका एक लाईन में जवाब देना संभव नहीं। दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए संविधान में संशोधन जरूरी है और यह संसद पर निर्भर है। दिल्ली में विश्वभर के दूतावास हैं, लोग रहते हैं, ऐसे में वर्तमान में ऐसा संभव नजर नहीं आता।
दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग आपने क्यों की थी?
शीला: मांग की थी लेकिन मिला तो नहीं। मांग करना अलग बात है। उस समय भी यह मुद्दा उठा था कि दिल्ली देश की राजधानी है। ऐसे में उसे पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं दिया जा सकता।
क्या आम आदमी पार्टी की सरकार का दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का प्रस्ताव सही है?
शीला: दिल्ली अन्य केंद्र शासित राज्यों के समान नहीं है। यह चंडीगढ़ नहीं है कि कोई भी काम व बात कर लो। यह देश की राजधानी है और विशेष है। इसे राज्य का दर्जा देने से पहले हर नफा-नुकसान को देखना होगा।
दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने पर राज्य सरकार को आर्थिक तौर पर नुकसान होगा या लाभ?
शीला : पहले पूर्ण राज्य का ढांचा तय करना होगा कि आखिर पूर्ण राज्य का दर्जा क्या होगा। आर्थिक तौर पर कोई विशेष फायदा नहीं होगा। हमने भी वर्तमान ढांचे में 15 वर्ष काम किया और दिल्ली में विकास कार्य किए।
आम आदमी पार्टी सरकार ने एनडीएमसी इलाके को बाहर रखने का निर्णय लिया है, क्या यह सही कदम है?
शीला: ऐसा प्रस्ताव तो हमने भी रखा था लेकिन दिल्ली देश की राजधानी है, उसका दो हिस्सों में बंटवारा नहीं किया जा सकता। यह किसी भी राज्य के लिए ठीक नहीं है।
प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय माकन ने दिल्ली का वर्तमान स्वरूप ही बनाए रखने की वकालत की है, क्या आप इससे सहमत हैं?
शीला : बिलकुल सहमत हूं। दिल्ली या केंद्र में किसी की भी सरकार हो मिलकर काम करना होगा। केंद्र में किसी की सरकार हो उसका इरादा ऐसा हो ही नहीं सकता कि दिल्ली में काम न हो। दिल्ली यदि सुंदर नहीं दिखी तो विदेशों में केंद्र का नाम ही खराब होगा न कि दिल्ली सरकार का।
आप सरकार का मानना है कि दिल्ली में उपराज्यपाल के कारण काम नहीं हो रहे, बिना कारण केंद्र के इशारे पर टकराव कर रहे हैं, ऐसे में दिल्ली को पूर्ण राज्य जरूरी है?
शीला: दिल्ली सरकार ने अपने कार्यकाल में टकराव के अलावा किया ही क्या है। उपराज्यपाल से हमारा भी टकराव हुआ लेकिन हम उनको साथ लेकर चले और काम किए। दिल्ली सरकार में कोई भी रहे दिल्ली के हित में उसे केंद्र व उपराज्यपाल से मिलकर ही चलना होगा। हमने टकराव के बावजूद अपने स्तर पर राजस्व एकत्रित किया व जनता के हित में काम किए जो सभी के सामने हैं।
भाजपा ने लोकसभा चुनाव में अलग से घोषणा पत्र लाकर दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलवाने का बात रखी थी?
शीला- वादा किया था तो भाजपा को उसे पूरा भी करना चाहिए।