नई दिल्ली। पटियाला हाउस कोर्ट ने बुधवार को अभिनेता जैकलीन फर्नांडिस, कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर और 15 अन्य के खिलाफ 200 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में औपचारिक रूप से आरोप तय किए। इसके अलावा दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा दर्ज एक अलग मामले में सुकेश चंद्रशेखर और 20 अन्य आरोपियों पर भी आरोप तय किए। इसमें संगठित अपराध के लिए कड़े मकोका प्रावधान भी शामिल हैं। दोनों मामलों में सभी आरोपी बुधवार दोपहर अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत शर्मा के समक्ष सभी आरोपियों ने आरोपों से इनकार करते हुए ट्रायल का दावा किया। कोर्ट ने 30 मई को दो अलग-अलग आदेशों में दोनों मामलों में आरोप तय करने का फैसला किया था। न्यायाधीश ने कहा था कि आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ पर्याप्त प्रथम दृष्टया सामग्री उपलब्ध है।
ईडी मामले में न्यायाधीश ने कहा कि सभी आरोपियों पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 3 के तहत अपराध का आरोप लगाया जाए, जो धारा 4 के तहत दंडनीय है। दिल्ली पुलिस के मामले में सुकेश चंद्रशेखर पर सरकारी अधिकारी का रूप धरने, धोखाधड़ी, ब्लैकमेलिंग, आपराधिक धमकी, आपराधिक साजिश, आईटी एक्ट और मकोका की धाराओं के तहत आरोप तय किए गए। सुकेश की पत्नी लीना पॉलोस पर भी समान आरोप लगाए गए, सिवाय सरकारी अधिकारी बनने वाले आरोप के। अदालत ने 17 अन्य लोगों पर भी विभिन्न आपराधिक धाराओं, आईटी एक्ट और मकोका के तहत आरोप तय करने के आदेश दिए। जैकलीन फर्नांडिस को ईडी ने कई बार समन भेजा था। एजेंसी ने अपनी दूसरी पूरक चार्जशीट में उन्हें पहली बार आरोपी बनाया। ईडी का आरोप है कि जैकलीन सुकेश चंद्रशेखर के लगातार संपर्क में थीं और पिंकी ईरानी के माध्यम से उनसे महंगे गिफ्ट्स प्राप्त किए।
दिल्ली पुलिस का केस अदिति सिंह की शिकायत पर दर्ज हुआ था। 15 जून 2020 को उन्हें एक लैंडलाइन नंबर से फोन आया, जिसमें कॉलर ने खुद को केंद्रीय विधि मंत्रालय का वरिष्ठ अधिकारी बताया और उनके पति तथा कंपनियों से जुड़े कानूनी मामलों में मदद का झांसा दिया। बाद में उसके सहयोगियों ने उच्च अधिकारियों का रूप धरकर करीब 217 करोड़ रुपये की राशि हड़पी। तकनीकी निगरानी के बाद पता चला कि यह सुकेश चंद्रशेखर था, जो पहले से रोहिणी जेल में बंद था।