सरकार के कार्यों की जांच के लिए तीन कसौटी आवश्यक हैं। पहली राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति दृढ़ता, दूसरा विकास और तीसरा जनकल्याण। इन तीनों ही कसौटियों पर मोदी सरकार पूरी तरह से खरी उतरी है। कोई भी वर्ग विकास से अछूता नहीं रहा है। प्रधानमंत्री की देश के प्रति दृढ़ता है कि भारत लगातार विकास कर रहा है। रविवार को एमिटी विश्वविद्यालय में विजय संकल्प सभा के दौरान बुद्धिजीवी वर्ग को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ये बातें कहीं।
उन्होंने कहा कि नोएडा से 2019 के लोकसभा चुनाव की पहली सभा को संबोधित कर रही हूं। पांच साल पहले चुनाव के दौरान जो मोदी सरकार ने वादे किए थे, आज मैं उन सभी का जवाब देने नोएडा आई हूं’। सरकार अपने कार्यकाल में कौशल विकास, मुद्रा, स्टैंड अप इंडिया, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, जन-धन जैसी कई योजना लेकर आई, जिसका फायदा आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय तबके को मिला है।
सरकार की बेहतर कार्यशैली का ही नतीजा है कि विदेशों में भी इसका अनुसरण किया जा रहा है। नीदरलैंड ने भी जनधन योजना की जानकारी ली। वहीं, सुषमा के संबोधन के दौरान कार्यकर्ता भारत माता की जय, वंदे मातरम, मोदी-मोदी के नारे लगाते रहे। एमिटी का सभागार पूरा भरा हुआ था। कई लोग सीट न मिलने से खड़े होकर भाषण सुन रहे थे। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा प्रत्याशी डॉ. महेश शर्मा व विधायक पंकज सिंह ने भी लोगों को संबोधित किया।
मोदी के विदेश दौरों की कूटनीति आई काम
सुषमा ने कहा कि प्रधानमंत्री के विदेश दौरों को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं, लेकिन आज कूटनीतिक रिश्ते ही भारत के काम आ रहे हैं। जब उरी पर आतंकी हमला हुआ तो सर्जिकल स्ट्राइक और पुलवामा में हमला हुआ तो एयर स्ट्राइक से करारा जवाब दिया गया। पुलवामा अटैक के बाद भारत ने बालाकोट में घुसकर जैश-ए-मोहम्मद के कैंप पर हमला किया। किसी भी आम नागरिक को चोट नहीं पहुंची।
पाकिस्तान को 48 घंटे में भारतीय वायुसेना के पायलट को छोड़ना पड़ा। 2008 में हुए आतंकी हमले में 166 लोग मारे गए थे, इसके बाद भी तत्कालीन यूपीए सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। वहीं, उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आज भारत की साख बढ़ी है। हाल ही में ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक काउंसिल की बैठक में भारत को निमंत्रण मिलने पर संस्था का संस्थापक देश पाकिस्तान ने इसमें शामिल होने से मना कर दिया था। इसके बावजूद अन्य देशों ने भारत को आने से रोका नहीं। पाकिस्तान अब विश्व पटल पर अलग-थलग पड़ गया है। अब पाकिस्तान को सोचना होगा कि उसको शांति चाहिए या कुछ और।