सरकारी स्कूलों में नौनिहालों की सेहत के साथ खिलवाड़ हो रहा है। लंच के दौरान बच्चों की थाली में परोसे जाने वाले खाने की जांच में लापरवाही बरती जा रही है।
इस लापरवाही का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि पिछले तीन साल में किसी भी स्कूल में मिड डे मिल की जांच करने की जरूरत नहीं समझी गई।
सरकारी तंत्र की इस लापरवाही पर खुद मौलिक शिक्षा निदेशक ने नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने राज्य के सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को हर महीने मिड डे मिल की जांच सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं।
मिड डे मिल की जांच में बरती जा रही है लापरवाही पता लगते ही मौलिक शिक्षा निदेशक आरके खरब ने सभी जिलों के अधिकारियों को रिमांडर जारी किया है।
निदेशक ने जानकारी दी है कि तीन सालों में किसी भी स्कूल के मिड डे मिल इंजार्च ने खाने के नमूने की जांच की जहमत नहीं उठाई। जबकि मिड डे मिल की गुणवत्ता पर अंगुली उठती रही है।
बता दें कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत प्राथमिक कक्षा के विद्यार्थियों को दिए जाने वाले मिड डे मिल में 450 कैलोरी व 12 ग्राम प्रोटीन युक्त पका खाना उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
वहीं, उच्चतर प्राथमिक कक्षा के विद्यार्थियों को 700 कैलोरी व 20 ग्राम प्रोटीन युक्त गर्म पका मिड डे मिल मिलना चाहिए लेकिन इसकी गुणवत्ता परखने की जरूरत पिछले तीन साल से नहीं समझी गई।
लापरवाह प्रभारियों पर कसेगा शिंकजा
मौलिक शिक्षा निदेशालय ने बच्चों को पौष्टिक खाने की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाया है। हर महीने जांच तो करनी होगी। वहीं, जिला उपायुक्त के साथ खुद मौलिक एवं खंड शिक्षा अधिकारियों को मिड डे मिल की जांच सुनिश्चित करने लिए कहा गया है। मौलिक शिक्षा निदेशक की तरफ से जारी किए गए पत्र में लापरवाही बरतने वाले प्रभारियों पर कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी है।
जिला उपायुक्त की अध्यक्षता में कमेटी बनी हुई है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर कहा गया है कि वो कभी भी स्कूलों में जानकर खाने की जांच कर सकता है।-रामकुमार फलसवाल, जिला शिक्षा अधिकारी
रूटीन में कोई पत्र आया हो तो कह नहीं सकता। पत्र आएगा तो जरूर जांच करेंगे। वैसे मेरे संज्ञान में नहीं है कि मिड डे मिल की कभी जांच हुई हो।-डा. गुलशन अरोड़ा, सीएमओ फरीदाबाद।
-फाउंडेशन का उद्देश्य धन कमाना नहीं है, बल्कि सेवा भाव है। हमारा खाना राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त लैब से जांच होने के बाद ही स्कूलों में जाता है। हम क्वालिटी के साथ समझौता नहीं करते। 2006 से फांउडेशन फरीदाबाद, गुडग़ांव, पलवल, कुरूक्षेत्र में साढ़े तीन बच्चों को मिड डे मील बांटा जाता है।-धनंजय कृष्णदास, वाईस चेयरमैन इस्कान फूड रिलीफ फाउंडेशन
जिले में मिड डे मिल खाने वाले बच्चों की संख्या
कक्षा----------------संख्या (लगभग)
एक से पांचवीं--------57000
छठी से आठवीं-------32000
कक्षा-------------मिड-डे-मील खर्च
एक से पांचवीं------3.34 रुपये
छठी से आठवीं-----5.00 रुपये
क्या मिलता है बच्चों को
दाल चावल खिचड़ी
छोले चावल खीर
राजमा चावल दलिया