जगह-जगह बने फुट ओवर ब्रिज पर विज्ञापनों के अलावा और कुछ भी नजर आता है। यहां सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं है। ऐसा लगता है कि यह महज विज्ञापन लगाने और शुल्क वसूली के लिए ही बनाए गए हैं। जबकि इनमें लोगों की सुविधाओं का ख्याल नहीं रखा गया है। ऐसे में लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। प्रस्तुत है रिपोर्ट...
सेक्टर-30 जिला अस्पताल के सामने
यहां रोजाना ऐसे मरीज आते हैं, जिन्हें अगर लिफ्ट की सुविधा न मिले तो उनके लिए एफओबी बेकार है। सड़क पार करने के लिए उनको इसकी जरूरत महसूस होती है। लेकिन, लिफ्ट होगी तभी उनको इसका फायदा मिल पाएगा। यहां हालत यह है कि लिफ्ट के लिए कुछ दिन पहले तक लगाए गए जरूरी संसाधन भी हटा दिए गए हैं। एफओबी के आसपास शराब की बोतलें इस बात की गवाह है कि इसका उपयोग सड़क पार करने के बजाय दूसरे कार्यों के लिए भी हो रहा है। यहां प्रकाश व्यवस्था का भी अभाव है।
सेक्टर-62 फोर्टिस अस्पताल के पास
यहां की हालत भी दूसरे स्थानों की तरह ही है। यहां भी अभी तक लिफ्ट नहीं लग पाई है। इस बाबत स्थानीय लोगों ने कई बार मुद्दा उठाया। लेकिन, शायद नोएडा प्राधिकरण को लोगों की मांग गैर जरूरी लगी। यही कारण है कि अब तक यहां पर लिफ्ट समेत अन्य सुविधाओं की कमी है। वहीं, अधिकारी भी मौन साधे हुए हैं।
बीओटी लेवल पर होता है एफओबी का निर्माण
जहां-जहां भी एफओबी बने हैं, उसे नोएडा प्राधिकरण ने अलग-अलग एजेंसियों को बिल्ट ऑपरेट ट्रांसफर (बीओटी) स्तर पर दिया है। यानी उक्त एजेंसी को एफओबी बनाना है। नियम के तहत उनको दोनों ओर लिफ्ट भी लगानी है। यही नहीं पांच से सात वर्ष तक एफओबी और उससे जुड़े संसाधनों का रखरखाव भी करना है। अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो प्राधिकरण को कार्रवाई करने का अधिकार है। जिस एजेंसी ने एफओबी बनाया है, उसे पांच से सात वर्ष तक विज्ञापन लगाने का अधिकार होगा। इसी आधार पर उक्त एजेंसी अपना पैसा वसूलती है।
सीईओ ने हाल ही में की कड़ी कार्रवाई
सीईओ रितु माहेश्वरी ने एफओबी की शिकायत का संज्ञान लिया और कुछ एफओबी को बनाने वाली एजेंसियों पर कार्रवाई करते हुए विज्ञापन तक उतरवा दिए हैं। यही नहीं उन पर जुर्माने भी लगाया है। एफओबी से संसाधनों को नहीं जोड़ने पर ही यह कार्रवाई हुई है।
एफओबी के निर्माण में बीओटी लेवल पर काम करने वाली एजेंसियों की लापरवाही की बात सामने आई है। नियमों को ताक पर रखकर काम करने वाली एजेंसियों पर कार्रवाई की जाएगी।
- केके अग्रवाल, जीएम, नोएडा प्राधिकरण