नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाई जाएगी, जहां यूपी के फलों का जूस की पैकेजिंग की जाएगी। फिर एयरपोर्ट से जूस को विदेशों में निर्यात किया जाएगा। यूपी के फलों में आम पर खास फोकस रहेगा। वहीं, स्थानीय किसानों को भी इसका लाभ मिलेगा। वो भी आम, अमरूद जैसे फलों की पैदावार बढ़ा सकेंगे। उनको भी एक प्लेटफॉर्म मिलेगी। यूनिट स्थापित करने के लिए शासन स्तर की समिति ने कार्रवाई शुरू की है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के अंदर कार्गो हब की 87 एकड़ जमीन है, जिस पर कार्गो हब विकसित किया जा रहा है। प्रदेश सरकार ने यहां पर फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने का फैसला लिया है। यह यूनिट फलों पर आधारित होगी। यूनिट में फलों के जूस की पैकेजिंग होगी। फिर जूस को विदेशों में निर्यात किया जाएगा। यूनिट लगाने के लिए शासन स्तर से इसकी एक समिति का गठन किया गया है, जिसमें नायल, विश्व बैंक, इनोवा एग्री पार्क (भारत बायोटेक की सहयक कंपनी) के अधिकारी शामिल हैं।
प्राधिकरण के अफसरों ने बताया कि करीब सात एकड़ जमीन पर यूनिट लगेगी, जिसमें यूपी के फलों के जूस की पैकेजिंग होगी। एयर इंडिया और सिंगापुर हवाईअड्डा टर्मिनल सेवा के कोल्ड चेन सिस्टम के तहत यूनिट को विकसित किया जाएगा। सिंगापुर की कंपनी पर कार्गो हब की जिम्मेदार है। यूनिट में उत्पादों की ताजगी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात के मानकों का पालन किया जाएगा। अफसरों ने बताया कि विश्व बैंक से 350 करोड़ की सहायता मिलेगी। साथ ही प्रदेश सरकार 35 प्रतिशत तक सब्सिडी देगी। सब्सिडी संयंत्र, मशीनरी और तकनीकी के सिविल कार्यों के खर्च पर लागू होगी।
आम, अमरूद और खरबूजे की सबसे ज्यादा पैदावार
उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक आम, अमरूद व खरबूजे की पैदावार होती है। आम की कई प्रजाति की पैदावार है। इनमें भी सबसे अधिक दशहरी आम शामिल है। फलों के जूस के निर्यात का लाभ किसानों को भी होगा। गौतमबुद्ध नगर के किसानों को भी आम व अमरूद की पैदावार बढ़ाने का फायदा होगा। उनको एक नया बाजार मिलेगा। जहां कीमत भी अच्छी मिलने की उम्मीद है।
सेक्टर 22 ई में बनेगा गामा रेडिशन फैसिलिटी सेंटर
सेक्टर 22 ई में गामा रेडिशन फैसिलिटी सेंटर बनाया जाएगा, जहां फलों को ताला रखने और बैक्टीरिया से बचाने में मदद मिलेगी। अफसरों का कहना है कि विमान सेवा की सुरक्षा के कारण इसको एयरपोर्ट के पास नहीं बनाया जा सकता है। सेक्टर 22 ई एयरपोर्ट के पास है। यहां पर 10 एकड़ जमीन चिन्हित की गई है।
यमुना प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने बताया कि फूड प्रोसेसिंग यूनिट का वित्तीय मॉडल 15 दिन के अंदर तैयार हो जाएगा। जिसके बाद यूनिट को विकसित करने पर काम होगा। इस पर गठित समिति काम कर रही है।